बंगापानी (पिथौरागढ़)। भले ही सरकारें आखिरी व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बातें करती हों लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। बंगापानी के कनार और मेतली गांव की बात करें तो यहां की परेशानियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन गांवों तक पहुंचने के लिए नौ से 16 किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती है। ये गांव सरकार के दावों की पोल खोलते हैं। विकास का पर्याय बन चुकी सड़क तो ग्रामीणों को आज भी गांव से कई किलोमीटर बाहर निकलकर ही दिखती है। वर्षों से गांव तक सड़क पहुंचने की आस लगाए बैठे ग्रामीणों को कोरे आश्वासनों के अलावा आज तक कुछ नहीं मिला। इसी से आहत होकर कनार गांव के लोगों ने चुनाव में मतदान प्रक्रिया से किनारा कर लिया है।
प्रदेश में हर पांच साल में सरकार बदल जाती है लेकिन नहीं बदलता है तो कनार के करीब 2000 लोगों का जीवन। राज्य गठन के कई वर्षों बाद भी गांव तक सड़क नहीं पहुंची है। बीमारों को आज भी डोली पर 16 किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाया जाता है। ऊंची-नीची पगडंडियों से गुजरते हुए कई बार अस्पताल पहुंचने से पहले ही बीमार दम तोड़ देते हैं। गांव में डोली उठाने के लिए युवा नहीं मिलने से कई बार परेशानी बढ़ जाती है। ऊपर से संचार सेवाओं की बदहाली से लोग अपनों की कुशलक्षेम भी नहीं पहुंच पाते हैं। इसी तरह मेतली के ग्रामीण भी करीब नौ किमी की दूरी पैदल ही पार करते हैं। करीब एक हजार की आबादी वाले गांव के लोगों का कहना है आज तक उन्हें सड़क निर्माण को लेकर हमेशा कोरे आश्वासन ही मिले हैं। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि एक दिन उनके गांव तक भी सड़क जरूर पहुंचेगी।
वोट देने से रोड बनती तो जरूर देते
ग्रामीणों ने 2019 के लोकसभा चुनाव और इस बार के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया था। 588 मतदाता वाले इस गांव के लोगों को प्रशासन के अलावा चुनाव प्रक्रिया सपन्न कराने पहुंचे मतदान कर्मियों ने भी समझाने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीणों ने उनकी नहीं सुनी। ग्रामीणों ने कहा मतदान करके गांव तक सड़क पहुंच जाती तो हम हमेशा मतदान करते। विधानसभा, लोकसभा और पंचायत चुनावों में मतदान के बाद भी दिन नहीं सुधरे। सिर्फ कोरे आश्वासन मिले।
सरकारें तो कई बार बदलीं लेकिन उनके गांव की तस्वीर आज तक नहीं बदली है। पैदल रास्ते में अगर कोई कहीं गिर गया तो फिर मुश्किल हो जाती है। संचार सेवा भी बदहाल है। आज तक किसी ने भी हमारी परेशानियों पर ध्यान नहीं दिया है। - गणेश राम, कनार
चुनाव के दिन मतदान पार्टियां पूरा दिन बैठी रहीं लेकिन सड़क नहीं बनने से गुस्साएं लोगों ने मतदान नहीं किया। मतदान से सड़क नहीं मिलती, ऐसे में लोग वोटिंग के लिए नहीं आए। जब कोई हमारे बारे में नहीं सोचता तो मतदान का क्या फायदा। - देवेंद्र सिंह, कनार
जब से पैदा हुए हैं तब से नौ किमी की पैदल यात्रा ही करते आए हैं। सड़क तो जब गांव से बाहर आते हैं तभी दिखाई देती है। सड़क निर्माण के लिए सिर्फ आश्वासन मिले हैं। मगर सड़क आज तक नहीं पहुंच सकी। - राजेंद्र सिंह, मेतली
सड़क होती तो आने जाने में आसानी होती। मगर नौ किमी का सफर अकेले करना पड़ता है। कभी सामान लेकर जाना हुआ तो फिर तो घंटों लग जाते हैं। घर के लिए बाजार से राशन ले जाने में सबसे अधिक दिक्कतें होती हैं। - मान सिंह, मेतली