गणाई गंगोली (पिथौरागढ़)। पभ्या गांव की आबादी 35 दिनों से पानी के लिए संघर्ष कर रही है। गांव के लिए वर्ष 1964 में बनी पेयजल लाइन लगातार खराब होती रहती है।
इस समय-समय पर सुधारा जाता है लेकिन इस बार पेयजल लाइन की मरम्मत न होने के कारण लोग परेशान हैं जबकि कुछ समय पहले एक युवक पेयजल लाइन को ठीक करअपनी जान गंवा चुका है। इसके बाद भी शासन-प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। ग्रामीणों के दर्द को सिर्फ कोरे आश्वासन के हवाले कर दिया। इसका खामियाजा उन्हें खड़ी चढ़ाई में पानी ढोना पड़ रहा है।
पभ्या गांव की 320 आबादी पिछले 35 दिनों से पानी की बूंद के लिए तरस गए हैं। ग्रामीण चार किमी खड़ी चढ़ाई पार कर बसाड़ से पानी ढो रहे हैं। वर्ष 1964 में बनी 10 किमी लंबी पेयजल लाइन लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। इसकी देखभाल जल संस्थान करता है। गांव के लोग पानी के लिए तरस गए हैं। लोगों को सुबह-शाम सिर्फ पानी की चिंता सताती है। ग्रामीण बसाणी से चार किमी दूर से खड़ी चढ़ाई पार कर पानी लाने के लिए मजबूर हैं।
नवंबर से पेयजल लाइन कई जगह क्षतिग्रस्त होने के कारण लोग के घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा था। इसके बाद ग्रामीणों ने पेयजल लाइन को सुधारने का निर्णय लिया। सात ग्रामीणों ने इसका बीड़ा उठाते हुए स्रोत से मरम्मत का काम शुरू किया।
मरम्मत के बाद 23 नवंबर को घर लौटते समय सूजन सिंह पहाड़ी से नीचे गिर गए और उनकी मौके पर मौत हो चुकी है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ा। सिर्फ कोरा आश्वासन देकर 320 आबादी वाले गांव के दर्द को सबने दरकिनार किया।
पभ्या गांव के लिए बनी 10 किमी लंबी पेयजल लाइन काफी पुरानी है। बीच-बीच में पानी दो से तीन घंटे चल रहा है। फिर लाइन टूट रही है। पेयजल लाइन के कुछ पाइप बदले जाने हैं। इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। जल संस्थान के कर्मी लगातार मरम्मत के कार्य में जुटे हैं।
- ललित मोहन, जेई, जल संस्थान, गणाईगंगोली।
गांव में पिछले 35 दिनों से पानी के लिए ग्रामीण संघर्ष कर रहे हैं। चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग, बच्चे पानी ढोने के लिए मजबूर हैं। दर्द पर मरहम लगाने वाला कोई नहीं है। जनप्रतिनिधि, विभाग भी खामोश हैं।
- बलवंत सिंह, स्थानीय निवासी।
320 की आबादी वाले गांव के लिए 1964 में बनी पेयजल योजना बार-बार क्षतिग्रस्त होती रहती है लेकिन स्थायी रूप से इस ठीक नहीं किया गया है। इस बार मरम्मत के दौरान गांव के एक युवक की जान चली गई। इसके बाद भी मरहम पर कोरे आश्वासन का लेप लगा दिया गया।
-देवेंद्र सिंह डोबाल, ग्रामीण।