यहां जाड़े का मौसम आने से काफी पहले से ही कलक्ट्रेट में सन्नाटे का आलम दिख रहा था। अब तो यह सन्नाटा ज्यादा गहरा रहा है। बुधवार को यहां न तो डीएम का दफ्तर खुला, न एडीएम का दफ्तर खुला और न प्रभारी डीएम का ही दफ्तर खुल पाया। तहसीलदार की कुर्सी भी खाली मिली। एकमात्र एसडीएम सदर अनुराग आर्य जरूर रोज अपने दफ्तर में बैठ रहे हैं।
सुबह 10.30 बजे जब अमर उजाला टीम कलक्ट्रेट पहुंची तो वहां सुनसानी थी, जबकि वहां इस समय तक चहल-पहल शुरू हो जाती थी। डीएम एचसी सेमवाल 15 नवंबर से कोलकाता ट्रेनिंग में हैं। उनकी जगह एडीएम को प्रभारी डीएम का कार्यभार मिला तो वह सड़क दुर्घटना में घायल हो गए। बाद में सीडीओ विनोद गिरी गोस्वामी को प्रभारी डीएम का चार्ज मिला, लेकिन वह भी अवकाश पर चल रहे हैं। कलक्ट्रेट में डीएम के स्टेनो जरूर शासन से आने वाली डाक का निरीक्षण कर रहे थे। इसके अलावा उनके पास ज्यादा कोई काम नहीं था।
यहां का तहसील कार्यालय अब कलक्ट्रेट से सटे वन पंचायत के भवन में शिफ्ट हो गया है। वहां पर सुबह 11 बजे तहसीलदार की कुर्सी खाली मिली। आफिस के कर्मचारियों ने बताया कि तहसीलदार हरीराम आफिस के काम से देहरादून गए हुए हैं। वह कब आएंगे पता नहीं था। लाजिमी है कि अब वह सोमवार को ही पहुंचेंगे क्योंकि बृहस्पतिवार को ईद मिलादुनवी और 25 दिसंबर को क्रिसमस का अवकाश है। अगले दिन शनिवार, फिर रविवार आ जाएगा। तहसील कार्यालय में दूरदराज गांवों से कुछ युवा जाति, आय, स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनाने को पहुंचे थे। उनकी प्रक्रिया तो निपट गई थी, लेकिन तहसीलदार के न होने के कारण उनको प्रमाणपत्र कब मिलेगा कहा नहीं जा सकता।
डीएम के न होने से अन्य विभाग भी सुस्त
जिले का मुखिया न होने के कारण अन्य विभाग भी सुस्त पड़े हैं। विभागीय अधिकारी सिर्फ अपने निदेशालयों से आने वाले पत्रों का जवाब दे रहे हैं। जिला स्तर पर उनको निर्देश देने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी का कहना है कि ऐसे में जिला कैसे चलेगा अंदाजा लगाया जा सकता है। वह कहते हैं कि सरकार ने इस जिले को लावारिस हालत में छोड़ दिया है।