मुनस्यारी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित बुग्यालों में फंसे पालतू जानवरे
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चीन सीमा को जोड़ने वाली मुनस्यारी-मिलम सड़क बंद होने से माइग्रेशन गांवों से ग्रामीणों का जानवरों के साथ लौटना मुश्किल हो गया है। सड़क बंद होने से बीते 20 दिनों से 120 से अधिक लोग माइग्रेशन गांवों में फंसे हैं और उनका वहां से निकलना मुश्किल हो गया है। समय से पूर्व बर्फबारी होने से माइग्रेशन करना लोगों की मजबूरी बन गया है।
20 दिन पूर्व मुनस्यारी-मिलम सड़क रसगाड़ी के पास भूस्खलन होने से बंद हो गई थी। यहां बना पुल आपदा की भेंट चढ़ गया था। इस बार उच्च हिमालयी क्षेत्रों में समय से पूर्व बर्फबारी होने से माइग्रेशन शुरू हो गया है। मल्ला जोहार क्षेत्र के मिलम, बुर्फू, बिल्जू, मर्तोली, लास्पा, ल्वा, मापा, गनघर, टोला, खिलांच और सुम्तू गांव से 120 से अधिक लोग अपने 400 से अधिक मवेशियों के साथ माइग्रेशन से निचले इलाके में लौटने की तैयारी में थे। सड़क बंद होने से उनका यहां से निकलना मुश्किल हो गया है। सभी सड़क खुलने का इंतजार कर रहे हैं ताकि माइग्रेशन से लौट सकें।
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नंदाष्टमी को गए 200 लोग बमुश्किल लौटे
मुनस्यारी क्षेत्र की आस्था के केंद्र नंदाष्टमी मेले में शामिल होने क्षेत्र के 200 लोग उच्च हिमालयी क्षेत्र में अपने पैतृक गांवों में पहुंचे थे। सड़क बंद होने से उनका गांवों से लौटना मुश्किल हो गया था। किसी तरह एनडीआरएफ औ पुलिस-प्रशासन की टीम ने उन्हें रेस्क्यू किया था।
रालम भेजा एक क्विंटल राशन
रालम में 30 लोग लंबे समय से फंसे हैं जो नहीं लौट पा रहे हैं। प्रशासन ने बीते दिनों यहां एक क्विंटल राशन भेजा है। ये सभी लोग सड़क और रास्ते खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
माइग्रेशन गांवों में राशन की कोई दिक्कत नहीं है। ग्रामीणों के फंसे होने की सूचना भी नहीं है। माइग्रेशन अक्तूबर महीने में शुरू होता है। ग्रामीणों को रेस्क्यू करने के लिए एसडीआरएफ की तैनाती की गई है। रसगाड़ी में अस्थायी पुल तैयार किया गया है। स्थायी पुल तैयार करने में समय लगता है। ग्रामीणों को दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
-श्रेष्ठ गुनसोला, एसडीएम, मुनस्यारी।