मुनस्यारी से मिलम तक 64 किलोमीटर लंबा ट्रैकिंग रूट पूरी तरह खोल दिया गया है। अब इस मार्ग से घोड़े और खच्चर भी जाने लगे हैं। आम लोगों के लिए पैदल रास्ता पहले से ही खुला हुआ था। इस बीच लोक निर्माण विभाग ने खराब स्थानों पर रास्ते की मरम्मत कर दी है और ट्रैकिंग रूट को सुगम बना दिया है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता पीसी जोशी ने बताया कि मिलम जाने वाले रास्ते में सिरकानी, गुलरटोन, मापांग में ग्लेशियर होने से अब तक रास्ते की मरम्मत नहीं हो पाई थी। अब ग्लेशियर पिघल गए हैं और रास्ता ठीक कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि बोगड्यार, नहरदेवी में पांच पांच और मिलम में सात मजदूर स्थायी रूप से तैनात कर दिए गए हैं ताकि रास्ते में किसी प्रकार की दिक्कत आए तो उसे ठीक किया जाए। उन्होंने बताया कि मिलम तक घोड़ों से राशन का ढुलान होने लगा है। साथ ही स्थानीय लोग भी अपना सामान ले जाने लगे हैं। मिलम ट्रैकिंग रूट पर इन दिनों ट्रैकरों की आवाजाही रहती है।
इस बीच लोनिवि ने अपने जूनियर इंजीनियरों को निर्देश दिए हैं कि वह मिलम रास्ते की स्थिति पर लगातार नजर रखें। यदि कहीं पर दिक्कत हो तो वहां पर जल्दी से मजदूर तैनात किए जाएं।