पिथौरागढ़ पुराना बाजार में स्वर्णकार की दुकानों में खरीदारी को उमड़ी भीड़। संवाद न्यूज एजेंसी
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पिथौरागढ़। कहते हैं जब श्रीराम अयोध्या लौटे थे तो प्रजा ने उनके स्वागत में घी से दीये जलाए थे और तभी से दिवाली पर दीये जलाने की परंपरा शुरू हुई लेकिन वर्तमान परिदृश्य में घी तो छोड़ो लोग तेल से दीये जलाने पर भी 10 बार सोच रहे हैं। सरसों और तिल के तेल के दामों में हुए इजाफे से सीमित आय वर्ग के लोगों ने अपने खर्चों में भी कटौती कर दी है।
सीमांत जिले में सरसों और तिल का तेल 200 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। पिछले वर्ष ये तेल के दाम 90 से 100 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से था। रिफाइंड तेल के दाम भी पिछले वर्ष की तुलना में 90 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 170 से 180 रुपये हो गए हैं। बढ़ती महंगाई के कारण इस दीपावली लोगों की जेब खाली ढीली हो रही है।
निर्धन वर्ग और मध्यम वर्ग के लोग बढ़ती महंगाई से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। व्यापारी रवि धामी कहते हैं कि तेल के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं। लोग खरीदारी करने से पहले 10 बार सोच रहे हैं। सरकार को महंगाई कम करने को लेकर प्रयास करने चाहिए।
तेल के दामों से दीयों की बिक्री प्रभावित
पिथौरागढ़। तेल की बढ़ती कीमतों के बीच मिट्टी के दीयों की बिक्री भी पिछले साल की तुलना में कम हुई है। लोग मिट्टी के दीयों की जगह मोमबत्ती की ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं।
बोली महिलाएं-
लगातार बढ़ती महंगाई के कारण इस बार दीपावली का पर्व फीका लग रहा है। खुलकर सामान की खरीदारी नहीं कर पा रहे हैं। दीपावली रोशनी का त्योहार है लेकिन तेल के बढ़ते दामों के कारण इस बार मोमबत्ती जलाने का निर्णय लिया है। - भावना जोशी।
सरकार को खाद्य तेल, रोजमर्रा के सामान के दामों को कम करना चाहिए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। तेल के बढ़ते दामों के बीच इस बार रोशनी के पर्व पर दीये जलाना काफी महंगा हो गया है। लोगों की क्रय शक्ति कम हो गई है। -भवना कन्याल।
तेल के तुलनात्मक दाम
तेल - 2020 - 2021
सरसों - 110 - 200
तिल - 120 - 200
रिफाइंड - 90 - 170