गंगोलीहाट में लव कुश कांड के मंचन का दृश्य
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गंगोलीहाट में चल रहे लव-कुश कांड में लव-कुश के जन्म से लेकर अश्वमेध यज्ञ के रथ को रोकने तक की लीला हुई।
रामलीला मंच में चल रहे लव-कुश कांड के दूसरे दिन के मंचन की शुरुआत में लक्ष्मण के वन में छोड़ने के बाद सीता माता आत्महत्या के इरादे से एक पेड़ की ओर बढ़ती हैं। इस बीच वहां से गुजर रहे महर्षि वाल्मीकि उन्हें रोक लेते हैं। मुनि सीता को अपने आश्रम में ले आते हैं। जहां सीता लव को जन्म देती हैं। एक दिन लव को कुटिया में सुलाकर सीता स्नान को जलाशय जाती हैं तो महर्षि वाल्मीकि से लव की देखरेख करने का आग्रह करती हैं। थोड़ी देर में लव जलाशय की ओर चला जाता है। महर्षि वाल्मीकि लव को कुटिया में न पाकर चिंतित हो उठते हैं।
लव के किसी जंगली जानवर का शिकार होने की आशंका को देखते हुए मंत्रशक्ति से कुश के तिनके से लव के समान दिखने वाले एक बालक को पैदा कर देते हैं। सीता जलाशय से लव के साथ लौटती हैं। महर्षि वाल्मीकि सारा वृत्तांत सीता को सुनाते हैं। कुश से पैदा बालक का नाम कुश रख दिया जाता है। महर्षि वाल्मीकि लव-कुश को शस्त्र विद्या का गहन प्रशिक्षण देते हैं। उधर, अयोध्या में भगवान राम अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा रवाना करते हैं। महर्षि वाल्मीकि के आश्रम के पास यज्ञ का घोड़ा पहुंचता है तो लव-कुश शत्रुघ्न को परास्त कर अश्वमेध का घोड़ा रोक देते हैं।