पिथौरागढ़। जिले में राज्य गठन के बाद रोडवेज की बसों का बेड़ा सिमट गया। जिन रूटों में केवल रोडवेज की बसें संचालित होती थीं उन रूटों में अब केवल टैक्सियों का कब्जा है। लोगों को अधिक किराया देकर आवाजाही करनी पड़ती है। इसके बावजूद परिवहन निगम ने रोडवेज की बसें संचालित करने के लिए कोई पहल नहीं की है।
राज्य गठन से पूर्व जिला मुख्यालय से शहरी क्षेत्रों के साथ ही स्थानीय रूटों के लिए भी बसों का संचालन होता था। इनमें नेपाल सीमा से लगा पीपली, पसमा समेत धारचूला के तवाघाट, मुवानी-थल, राईआगर, डीडीहाट, मुनस्यारी, बरम-मदकोट के लिए बसों का संचालन होता था। उस समय जिले में 80 से अधिक बसों का बेड़ा था। राज्य गठन के बाद लगभग सभी रूटों से बसें एक-एककर गायब होती रहीं। अब इनमें से केवल मुनस्यारी और धारचूला से ही सीधी दिल्ली के लिए बस सेवा संचालित है।
मुख्यालय से किसी भी आंतरिक रूट में बसों का संचालन नहीं होता है। ऐसे में पूरी तरह से इन रूटों में टैक्सियों का कब्जा है। यात्रियों को टैक्सियों में अधिक किराया देकर आवाजाही करनी पड़ती है। सरकार ने 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए जो मुफ्त यात्रा की योजना संचालित की है उसके लाभ से भी लोगों को वंचित रहना पड़ता है। जनमंच के संयोजक भगवान सिंह रावत का कहना है कि राज्य बनने के बाद बसों की संख्या में बढ़ोतरी कर सभी प्रमुख रूटों के लिए बसों का संचालन करना चाहिए था लेकिन इसके लिए कोई प्रयास नहीं किए गए।
इस बारे में पिथौरागढ़ रोडवेज डिपो के एआरम राजेंद्र कुमार का कहना है कि किसी क्षेत्र से बस संचालन के लिए मांगपत्र नहीं आया है। यदि मांगपत्र आता है तो बस के संचालन के लिए आगे की कार्यवाही शुरू की जाएगी।