चंद्र सिंह धामी, प्रधान, दारमा।
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बंगापानी (पिथौरागढ़)। बंगापानी क्षेत्र की 14 हजार की आबादी आयुर्वेदिक अस्पताल मवानी दवानी के भरोसे है। करीब 60 साल पहले खुले इस अस्पताल में चिकित्सक तो तैनात हैं, लेकिन जरूरत के समय लोगों को उपचार नहीं मिलता है। इसलिए लोगों ने यहां एलोपैथिक अस्पताल भी खोलने की मांग की है।
आयुर्वेदिक अस्पताल में गंभीर बीमारियों का उपचार नहीं हो पाता है। जांच की भी कोई सुविधा नहीं है। एक दर्जन से अधिक गांव के लोगों को हल्के बुखार और जुकाम की दवा तो आसानी से मिल जाती है, लेकिन घटना या अन्य कोई बीमारी होने पर उन्हें 100 किमी दूर जिला अस्पताल में उपचार के लिए जाना पड़ता है। पिथौरागढ़ आने के लिए एक तरफ का टैक्सी का किराया 350 रुपये देना पड़ता है। यदि समय पर उपचार नहीं हुआ तो एक दिन रुककर अगले दिन लौटना पड़ता है जिसमें हजार रुपये से अधिक का खर्चा अतिरिक्त लगता है।
तहसील क्षेत्र में आयुर्वेदिक अस्पताल तो खोल दिया गया, लेकिन उसमें जरूरी उपचार मिलना मुश्किल हो जाता है। गंभीर बीमारियों के लिए 100 किमी दूर पिथौरागढ़ जिला अस्पताल ही उपचार के लिए जाना पड़ता है। क्षेत्र में किसी भी प्रकार की जांच सुविधा भी नहीं है। - नारायण सिंह टोलिया, प्रधान, बंगापानी।
शासन प्रशासन को अस्पताल का उच्चीकरण कर पीएचसी या सीएचसी करना चाहिए, जिससे जरूरत के समय लोगों को उपचार मिल सके। वर्तमान में बुखार, जुखाम और कुछ छोटी बीमारियों का उपचार तो जाता है, लेकिन मर्ज बढ़ जाए तो फिर जिला अस्पताल जान के लिए 700 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। - चंद्र सिंह धामी, प्रधान, दारमा।