कनालीछीना (पिथौरागढ़)। तेंदुए के हमले के बाद ख्वांतड़ी, ग्वेता, कापड़ीगांव, बजेता के लोगों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है। इन क्षेत्रों के करीब 50 बच्चे डर से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीणों ने तेंदुए को मारने की मांग की है।
ख्वांतड़ी, ग्वेता, कापड़ीगांव, बजेत के करीब 50 बच्चे कनालीछीना स्कूल पढ़ने को आते हैं। तेंदुए के हमले बढ़ते देख बच्चों ने स्कूल जाना बंद कर दिया है। अभिभावकों और बच्चों का कहना है कि क्षेत्र में आदमखोर तेंदुए की दहशत बढ़ती जा रही है। इसके बाद भी वन विभाग मौन है।
अभिभावकों का कहना है कि आदमखोर तेंदुआ मारने तक वे बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। जीआईसी कनालीछीना में पढ़ने वाले गोविंद कुमार का कहना है कि गांवों से स्कूल की दूरी अधिक होने और जंगल का रास्ता होने के कारण डर लगा रहता है। भाजपा मंडल अध्यक्ष हरीश कोहली, ग्रामीण गोविंद सिरोला, हरीश पोखरिया, राजू सामंत, विनोद कुमार आदि ने तेंदुए को मारने की मांग की है।
हमारे गांव में लंबे समय से तेंदुए का आतंक है। अकेले स्कूल जाने में हर समय डर लगा रहता है। आदमखोर तेंदुआ मारे जाने तक स्कूल नहीं जाऊंगी।
- अक्षरा सामंत, छात्रा कनालीछीना।
पहले ही कोरोना के कारण स्कूल बंद होने से पढ़ाई प्रभावित हुई है। कई माह बाद अब स्कूल खुलने के बाद तेंदुए के हमले का डर सता रहा है।
- छाया सामंत, जीजीआईसी कनालीछीना।
अकेले स्कूल जाने में काफी डर लग रहा है। वन विभाग को शीघ्र तेंदुए को मारना चाहिए। यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो फिर किसी के साथ हादसा हो सकता है।
- सौरभ कुमार, जीआईसी कनालीछीना।
गांव से स्कूल काफी दूर है। झुंड में भी स्कूल जाने में भी डर लगी रहती है। आदमखोर तेंदुए को शीघ्र मारना चाहिए। इसके बाद ही स्कूल जाएंगे।
- ज्योति, जीजीआईसी कनालीछीना, कक्षा 11
ग्रामीण तेंदुए के आतंक से परेशान हैं। लोग अकेले आने, जाने में डर रहे हैं। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजना खतरे से खाली नहीं होगा।
- रवींद्र कुमार, ग्राम प्रधान ग्वेता और ग्राम प्रधान संगठन ब्लॉक अध्यक्ष।
तेंदुए के आतंक से लोग दहशत में हैं। सभी ग्रामीणों ने तय किया है कि तेंदुए को मारने या जंगल से हटाने तक वह बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
- राजू सामंत, ग्रामीण ख्वांतड़ी।