मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। बंगापानी, मुनस्यारी तहसील में 18 और 19 जुलाई को आई आपदा के प्रभावितों के जख्म अब भी हरे हैं। कुमाऊं कमिश्नर के भ्रमण के बाद भी आपदा प्रभावितों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। कई परिवारों को मुआवजा तक नहीं मिला है। गांवों को जाने वाले ध्वस्त पैदल रास्तों को अब तक पूरी तरह से सुधारा नहीं जा सका है। यह स्थिति तब है जबकि कुमाऊं कमिश्नर व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए थे और पूर्व सीएम हरीश रावत, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने भी सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए थे।
आपदा प्रभावितों क्षेत्रों में कुमाऊं कमिश्नर के भ्रमण के बाद अरविंद ह्यांकी ने शीघ्र राहत पहुंचाने के निर्देश दिए थे। मुआवजा दिए जाने में ग्रामीणों के भेदभाव करने के आरोप के बाद कमिश्नर ने तत्कालीन एसडीएम भगत फोनिया और तहसीलदार अबरार अहमद के नेतृत्व में एक पांच सदस्यीय जांच कमेटी को आपदा का पुनर्मूल्यांकन करने के निर्देश दिए।
कमेटी के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद भी आपदा प्रभावितों को मुआवजा नहीं मिल पाया है। हालांकि कमिश्नर के दौरे के बाद राहत शिविरों में रह रहे प्रभावितों को एक दिन खाद्यान्न किट एवं कुछ टेंट देने के साथ कुछ हद तक पैदल मार्ग दुरुस्त हुए हैं। पर अभी तक आपदा प्रभावित क्षेत्रों को जाने वाले रास्ते अच्छे तरीके से ठीक नहीं हो पाए ह्रैं।