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1967 के युद्ध में भारतीय फौजों ने मार गिराए थे 400 चीनी सैनिक

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बहादुर सिंह, रिटायर्ड सूबेदार। - फोटो : PITHORAGARH
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गंगोलीहाट/पिथौरागढ़। लद्दाख में चीन जिस तरह से घुसपैठ कर भारत को उकसाने वाली हरकतें कर रहा है उस मुद्दे पर अमर उजाला ने पूर्व सैन्य अधिकारियों से बातचीत की। ये ऐसे सैन्य अधिकारी हैं जिन्होंने 1962 से लेकर 1971 तक चीन और पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध लड़े हैं। इस बातचीत के दौरान पूर्व सैन्य अधिकारियों ने युद्ध के अनुभव बताने के साथ ही तब और आज के हालात पर अपनी बात रखी और कहा कि चीन को समझ लेना चाहिए कि अब भारत 1962 का भारत नहीं रहा।
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1967 के युद्ध की कहानी ऑनरेरी कैप्टन धन सिंह की जुबानी
गंगोलीहाट। 73 वर्षीय ऑनरेरी कैप्टन धन सिंह बताते हैं कि 1967 में भारत चीन का युद्ध नाथुला और चूला में हुआ था। तीन दिन तक लड़ाई चली। राजपूताना राइफल, ग्रेनेडियर और 16 कुमाऊं ने एक तरफ से तो दूसरी ओर से जेएंडके राइफल और गोरखा रेजीमेंट ने मोर्चा संभाला था। इस लड़ाई में अमेरिका के खरीदे गए एसएलआर जैसे हथियार सेना के पास आ गए थे। मोर्चे पर हथियारों की कमी न हो, इसके लिए तत्कालीन डिप कमांडर मेजर जनरल सतत सिंह ने सभी हथियारों के गोदाम और तोपखाने खुलवा दिए थे। इस लड़ाई में चीन घुटनों के बल बैठ गया था।
ग्लोबल टाइम्स में इस लड़ाई में लगभग 400 चीनी सैनिकों के मारे जाने की खबर छपी थी। आज तो भारत के पास आधुनिक हथियार हैं। सीमा तक सड़कें पहुंच गईं हैं। भारत को चीन पर दबाव बनाए रखना चाहिए। धन सिंह कहते हैं चीन को जितना दबाकर रखेंगे वह दबा रहेगा। इस दौरान वह जोश में भर जाते हैं और कहते हैं कि वह आज भी चीन के दांत खट्टे करने सीमा पर जाने को तैयार हैं।
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1962 में थ्री नॉट थ्री से किया था चीनी सेना का मुकाबला
गंगोलीहाट। चीन के साथ 1962 में नाथुला दर्रे में लड़ाई लड़ने वाले खतीगांव निवासी पूर्व सूबेदार बहादुर सिंह 83 साल के हो चुके हैं। 1955 में सेना में भर्ती हुए बहादुर सिंह ने बताया कि 1962 में उन्होंने चीनी सेना का मुकाबला थ्री नॉट थ्री बंदूक से किया था। उसमें दस ही राउंड आते थे। बार-बार फायरिंग के लिए मैग्जीन बदलनी पड़ती थी। बहादुर सिंह अपने नाम की तरह बहादुर भी हैं। 1965 और 1971 का युद्ध भी उन्होंने लड़ा।
इस लड़ाई में उनके गाल में गोली लग गई थी। इससे उनका जबड़ा ही साफ हो गया था। इसके बाद लखनऊ के कमांड अस्पताल में उनका इलाज चला। तब जांघ से मांस निकालकर उनके गाल में लगाया गया। 1983 में सेना से रिटायर हुए बहादुर सिंह कहते हैं कि 1962 में हालात बहुत विपरीत थे। गेेहूं-चावल के लिए भी अमेरिका पर निर्भर थे। अब भारत ने काफी तरक्की कर ली है। भारतीय सेना आज दुनिया की सशक्त सेनाओं में शामिल है। चीन को यह समझ लेना चाहिए। यदि चीन आज कोई हिमाकत करता है तो निश्चित रूप से उसको शिकस्त ही मिलेगी।

धन सिंह, आनरेरी कैप्टन।- फोटो : PITHORAGARH

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