मुवानी/गणाईगंगोली/गंगोलीहाट। मुवानी में रामलीला के छठे दिन की लीला में दशरथ मरण तक की लीला का मंचन किया गया।
इस दौरान सुमंत का वन जाकर राम को अयोध्या लौटने का आग्रह करना, राम का सुमंत को वापस भेजना, सुमंत का अयोध्या जाने से पहले विलाप- अवध में कह मुख ले जाऊं, कहूं क्या पूछें जब राजा.. पर दर्शक भाव विभोर हो गए। आज पुत्र वियोग में राजा दशरथ का प्राण त्यागना, कैकई-भरत, मंथरा-शत्रुघ्न संवाद तक की लीला का मंचन किया गया। वक्ता मैनेजर भुवन चंद्र जोशी रहे। दर्शक देर रात तक लीला का आनंद उठा रहे हैं। मुख्य अतिथि समाजसेवी कैलाश राठौर, प्रदीप राठौर रहे। इस अवसर पर अध्यक्ष रमेश बम, दीपक कार्की, व्यवस्थापक जीवन बोरा, निर्देशक संजय लाल वर्मा, हंस पाल , शिवराज सिंह, बहादुर सिंह कार्की, विक्रम कठायत आदि मौजूद रहे। उधर गणाईगंगोली में लीला के पांचवें दिन राम वनवास से केवट का नदी पार कराने तक का मंचन किया गया। इस दौरान राम के कल के राजा आज हम सन्यासी चौपाई में दर्शक भावुक हो गए।
मुख्य अतिथि प्रधान गुना किटाण महेंद्र गंगोला, गणाई अनिल कुमार, राजकमल मेहता रहे। कमेटी अध्यक्ष ललित उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत किया। उधर गंगोलीहाट के महाकाली मंदिर परिसर में मंचन में छठे दिवस की लीला में दशरथ का प्राण त्यागना, भरत-कैकई, शत्रुघ्न-मंथरा संवाद, भरत-शत्रुघ्न का परिवार सहित वन गमन, राम-भरत संवाद, भरत का खड़ाऊं लेकर वापस आने तक तक के दृश्यों का मंचन किया गया। यहां कमेटी के अध्यक्ष हेमराज रावल, सूबेदार मोहन सिंह रावल, सूबेदार शंकर सिंह रावल, किशन उप्रेती, कैलाश सिंह, ललित उप्रेती, राजेंद्र सिंह रावल, पूर्व प्रमुख ललित पाठक समेत दर्शक मौजूद रहे।