पिथौरागढ़। चंडाक स्थित मैग्नेसाइट फैक्टरी लंबे समय से बंद पड़ी है। सीमांत के लोग फैक्टरी को शुरू करने की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। अगर मैग्नेसाइट फैक्टरी शुरू हो गई तो लोगों को रोजगार मिलेगा।
ओडिशा निवासी उद्योगपति जेके झुनझुनवाला ने वर्ष 1974 में चंडाक में मैग्नीशियम कार्बोनेट (मैग्नेसाइट) का खदान शुरू किया था। बेहतर गुणवत्ता के कारण यहां से कच्चा माल निकालकर ओडिशा भेजा जाने लगा। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद वर्ष 1980 में चंडाक में डीबीएम प्लांट लगाया गया। वर्ष 1996 तक फैक्टरी ठीक चली लेकिन वर्ष 1998 आते-आते फैक्टरी बंद हो गई। वर्तमान में फैक्टरी के आसपास श्रमिकों के लिए बनाए गए आवास भी अब खंडहर हो चुके हैं।
लोगों का कहना है कि इनवेस्ट समिट के आयोजन के बीच मैग्नेसाइट फैक्टरी को शुरू करने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
कर्मचारियों को है कोर्ट के फैसले का इंतजार
फैक्टरी के बंद होने के बाद कर्मचारियों और श्रमिकों को वेतन, ग्रेच्युटी, बोनस और ईपीएफ का भुगतान किए बिना ही निकाल दिया गया था। चार मार्च 1999 को 350 कर्मचारियों, श्रमिकों को बर्खास्त कर दिया गया था। कई कर्मचारी और श्रमिक 12 साल तक संघर्ष करते रहे। यह विवाद सुलझाने के लिए प्रादेशिक औद्योगिक निवेश निगम ने वर्ष 2001 में एक समिति गठित की। इस फैक्टरी के परिसमापन के लिए औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड (बीआईएफआर) ने मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा। इसके बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर कर्मचारियों ने वर्ष 2009 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वाद दायर किया था। कर्मचारी और श्रमिक इस वाद के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। संवाद
सरकार को बताना चाहिए कि इनवेस्ट समिट के बाद कितने उद्योगपतियों ने राज्य में निवेश कर लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया। ऐसा ही है तो चंडाक मैग्नेसाइट फैक्टरी को सरकार क्यों शुरू नहीं कर रही है। - महेंद्र लुंठी, प्रदेश प्रवक्ता कांग्रेस।
सरकार ने इनवेस्ट समिट के माध्यम से करोड़ों के एमओयू साइन किए हैं। इसके परिणाम भविष्य में दिखेंगे। इसके अलावा समय-समय पर प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन कर युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। - गिरीश जोशी, भाजपा जिलाध्यक्ष पिथौरागढ़।