गुरजन सिंह गुंज्याल, फाइल फोटो
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पिथौरागढ़। ‘आज दो अभी दो उत्तराखंड राज दो’ का नारा राज्य आंदोलनकारी गुरजन सिंह गुंज्याल ने ही दिया था। यह ऐसा नारा था जो राज्य आंदोलन के दौरान पिथौरागढ़ की गलियों के बाद पूरे पहाड़ में गूंजा था। जिस आंदोलनकारी का दिया नारा पूरे पहाड़ में गूंजा था आज वही आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले गुरजन सिंह गुंज्याल धारचूला के गुंजी के निवासी थे। उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़े गुरजन सिंह ने अलग राज्य को लेकर चले आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पृथक राज्य की मांग को लेकर गुंजी से लेकर दिल्ली तक की पैदल यात्रा करने वाले गुरजन सिंह ने ही ‘आज दो अभी दो उत्तराखंड राज दो’ नारा दिया था। यह नारा पहले पिथौरागढ़ की गलियों में पोस्टर-बैनरों में नजर आया और देखते ही देखते पूरे पहाड़ में गूंजने लगा।
वरिष्ठ पत्रकार बद्री दत्त कसनियाल ने बताया कि उत्तराखंड आंदोलन की जो ज्वाला भड़की थी उसमें कई नारे काफी प्रचलित हुए थे। इन्हीं में ‘आज दो अभी दो उत्तराखंड राज दो’ का नारा भी शामिल था। उन्होंने बताया कि स्व.गुरजन सिंह में पोस्टर और पंफलेट बनाने में महारत हासिल थी। उनकी इतनी क्षमता थी कि पेपर और स्याही उपलब्ध कराते ही पोस्टर और पंफलेट अकेले तैयार कर देते थे। प्रमुख राज्य आंदोलनकारी गुरजन सिंह गुंज्याल का 88 साल की उम्र में निधन हो गया। राज्य आंदोलनकारी गुरजन सिंह ने धारचूला स्थित अपने आवास में अंतिम सांस ली। बुधवार को उनका सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।