यदि हम बेटा बेटी मेें फर्क न करें तो वो मान-सम्मान और खुशी हमें बेटियां भी दिला सकती हैं जिसकी हम अक्सर बेटों से उम्मीद लगाते हैं। डीडीहाट के तहसील वार्ड निवासी बालक सिंह चुफाल और उनकी पत्नी लक्ष्मी चुफाल इसका उदाहरण हैं। उनकी पांच बेटियां और एक बेटा है। उन्होंने बेटियों और बेटे में कोई फर्क नहीं किया। अपनी पांचों बेटियों को इस दंपति ने कभी बोझ नहीं समझा। मेहनत मजदूरी कर उन्होंने अपनी पांचों बेटियों को पढ़ाया लिखाया और हर संभव सपोर्ट किया। आज उनकी दो बेटियां स्वास्थ्य विभाग में हैं और तीन बेटियां एक साथ पुलिस कांस्टेबल बनी हैं। ये पांचों बहनें अब अपने सबसे छोटे भाई को अच्छी शिक्षा दिलाना चाहती हैं और वे इसके लिए सामर्थ्यवान भी हो गई हैं।
बालक सिंह चुफाल एवं लक्ष्मी चुफाल बेटियों के लिए कभी कोई कमी नहीं की। उनको पढ़ाने के लिए इस दंपति ने पत्थर तोड़े, मजदूरी की। दो बेटियां मीरा और रक्षा पहले से ही स्वास्थ्य विभाग में नौकरी पर लग गईं। इस बार जब उत्तराखंड पुलिस में महिला आरक्षी की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई तो उनकी तीन अन्य बेटियां मनीषा, कविता और सोनिया ने एक साथ इसके लिए आवेदन किया। मई में चंपावत में हुए फिजिकल टेस्ट में तीनों सफल हो गईं। जुलाई में हुई लिखित परीक्षा पास करने के बाद तीनों बहनों का मेडिकल के लिए चयन हो गया। 24 अक्तूबर को चंपावत पुलिस लाइन में हुए मेडिकल टेस्ट में भी तीनों पास हो गईं। अब मनीषा, कविता और सोनिया 2 नवंबर से चंपावत पुलिस लाइन में होने वाले छह दिन से प्रारंभिक प्रशिक्षण में हिस्सा लेंगी। उसके बाद उनको एक वर्ष की ट्रेनिंग के लिए श्रीनगर (गढ़वाल) भेजा जाएगा।
बालक सिंह का कहना है कि उन्होंने अपनी गरीबी को बेटियों की पढ़ाई के लिए कभी बाधक नहीं बनने दिया। यदि हर परिवार यही सोच रखे तो बेटियां जीवन में बड़ा सहारा बन सकती हैं। तीन बहनों का एक साथ पुलिस में चयन होने पर यहां के तमाम संगठनों ने खुशी जताई है। परिवार वालों को बधाई देने वालों का भी तांता लगा है।