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17 वर्षों में नहीं बन पाई गर्बाधार-गुंजी सड़क

Tue, 02 Oct 2018 10:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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गर्बाधार सड़क - फोटो : अमर उजाला
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धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्र के लिए गर्बाधार से गुंजी (32 किमी) सड़क 17 वर्षों में भी नहीं बन पाई। सड़क के लिए चट्टानों को जिस तरह से काटा गया है, इससे वहां हमेशा दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

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तवाघाट से आगे पांगला तक 24 किमी सड़क सीमा सड़क संगठन ने वर्ष 1995-96 में तैयार कर ली थी। इसके बाद पांगला से गर्बाधार तक चार किमी सड़क काटने में लंबा वक्त बीत गया। गर्बाधार से रॉक तक सड़क कटिंग तो हुई है, लेकिन यह बेहद ही खतरनाक है। रॉक तक पहुंचने के लिए जान हथेली पर रखकर यात्रा करनी पड़ती है। सड़क निर्माण का कार्य 67 ग्रिफ को दिया गया है। गर्बाधार से रॉक तक जीप जाने लायक मार्ग तो काट दिया गया है, लेकिन ऊपरी पहाड़ियों में कटी चट्टानें लटक रही हैं।

नजंग से लखनपुर के बीच तो इक्का-दुक्का लोग ही जान जोखिम में डालकर आवागमन कर पाते हैं। यहां ब्लास्टिंग से पहाड़ियां पूरी तरह दरक गई हैं। यहां से गुंजी की सड़क भी बेहद दुरूह है। रं कल्याण समिति के अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल बताते हैं कि बूंदी से छियालेख के बीच करीब 20 से 25 खतरनाक मोड़ हैं। ऊपरी पहाड़ी दरक गई तो पल भर में ही पूरी सड़क ध्वस्त हो सकती है।
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उनका कहना है कि साइड में जो डोजर चला रहे हैं, उन्हीं के अनुसार सड़क काटी जा रही है। धारचूला एसडीएम आरके पांडेय के अनुसार कई स्थानों पर सड़क का एलायमेंट ही सही नहीं है। कार्य बेहद धीमी गति से हो रहा है। नजंग से लखनपुर के बीच सड़क बनाने में ही लंबा वक्त लग सकता है। उन्होंने बताया कि नजंग-लखनपुर के बीच प्रशासन ने आवागमन बंद कर दिया है। बता दें कि मार्ग का अन्य कोई विकल्प नहीं होने से लगातार ब्लास्टिंग के बीच लोग जान हथेली पर रख आवागमन कर रहे हैं। बावजूद इसके प्रशासन वैकल्पिक मार्ग की कोई व्यवस्था नहीं कर पा रहा है।

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