पिथौरागढ़। कस्बों में प्लास्टिक सहित अन्य प्रकार का कूड़ा समस्या बनता जा रहा है। नदी घाटी के किनारे स्थित बाजारों का कूड़ा नदियों को दूषित कर रहा है। इसमें सबसे अधिक मात्रा प्लास्टिक कचरे की होती है। थल कस्बे में भी यही समस्या है। रामगंगा नदी को कूड़े से बचाने के लिए प्रशासन ने कांपेक्टर मशीन लगाने का निर्णय लिया है। इसके माध्यम से जैविक और अजैविक कूड़ा कांपेक्ट किया जाएगा।
रामगंगा नदी के किनारे स्थित थल कस्बे में एतिहासिक शिव मंदिर है। इस मंदिर में भगवान शिव की बालेश्वर रूप में पूजा होती है। 16वीं शताब्दी में स्थापित इस मंदिर के समीप घाट स्थित है। इस घाट पर तमाम तरह के धार्मिक कार्य होते हैं। निकाय नहीं होने से थल कस्बे में सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में वर्षों से बाजार का अधिकतर कूड़ा नालों और गधेरों से सीधे रामगंगा नदी में प्रवाहित होता है। नदी में प्रवाहित होने वाले कूड़े में सबसे अधिक मात्रा प्लास्टिक कचरे की होती है।
स्वच्छ गंगा मिशन के तहत इस नदी को स्वच्छ रखने के लिए प्रशासन ने बृहद स्तर पर अभियान शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी डॉ.आशीष चौहान के नेतृत्व में सरकारी विभागों की मदद से थल घाट में स्वच्छता कार्यक्रम, गंगा आरती, जागरूकता अभियान चलाए गए हैं। इसके साथ ही कूड़े की समस्या से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने कांपेक्टर मशीन लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए जिलाधिकारी ने अधीनस्थों को मशीन लगाने के लिए स्थल चयन करने के निर्देश दिए हैं। कांपेक्टर मशीन लगने के बाद कूड़े की समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकेगा।