पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ शहर की सड़कों से लेकर गलियों तक अतिक्रमण के कारण लोगों को पैदल चलने के लिए स्थान नहीं मिल रहा है। हालात यह हैं कि वाहनों के वर्कशॉप से लेकर कुछ अस्पतालों की ओपीडी तक सड़क पर चल रही है। सड़क पर खड़े होकर कतार में लगे मरीजों के साथ कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद सभी आंखें मूंदे बैठे हैं।
एक लाख की आबादी वाला पिथौरागढ़ शहर विस्तार के साथ-साथ सुविधाओं के बजाय असुविधाओं की ओर बढ़ रहा है। शहर में सड़कों से लेकर गलियों तक में अतिक्रमण है। 30 से अधिक वाहनों के वर्कशॉप सड़कों में चल रहे हैं। किसी के पास मानकों के अनुसार गैराज तक नहीं है। सड़कों में ही गाड़ियों को सुधारा जाता है। राहगीरों को तेज रफ्तार वाहनों से बचते हुए सड़क पर चलना पड़ता है। इतना ही नहीं कुछ प्राइवेट अस्पताल सड़क पर ही मरीजों की कतार लगाकर ओपीडी चला रहे हैं। किसी वाहन के ब्रेक फेल होने या फिर चपेट में आने पर सड़क पर खड़े मरीजों के साथ कभी भी गंभीर दुर्घटना हो सकती है। जबकि इन रूटों से प्रतिदिन शहर के बड़े अधिकारी गुजरते हैं।
शहर की हर सड़कें पार्किंग स्थल बन चुकी हैं। सड़क के एक ओर पार्क वाहन, दूसरी ओर अतिक्रमण के कारण राहगीरों के चलने के लिए जगह नहीं बचती है। कुछ भवन स्वामी अपने घर की सड़कों और गलियों को दिन रात व्यक्तिगत पार्किंग स्थल के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। रात के समय छह फीट चौड़ी गलियां दिन में दुकानदारों के सामान फैलाने के बाद महज दो फीट रह जाती हैं। नगर के पुराना बाजार में सबसे बुरे हाल हैं। राहगीरों को आने जाने के लिए स्थान तक नहीं मिल पाता है। जिन गलियों को लोगों के चलने के लिए बनाया गया है उनमें दुकानों के बाहर दुकानें चल रही हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
नगरपालिका भी कभी कभार चालान काटकर खानापूर्ति कर देती है। जबकि पिथौरागढ़ शहर में आबादी के साथ ही सड़कों में प्रतिदिन दस नए वाहन उतर रहे हैं। इनके लिए पार्किंग की कोई सुविधा नहीं है। नीति नियंताओं के पास भविष्य की कोई प्लानिंग नहीं होने से और अधिक असुविधाएं बढ़ने के आसार पैदा हो गए हैं। नगरपालिका के ईओ मनोज दास का कहना है कि शहर को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता रहता है।
व्यापारियों की कार से लेकर ट्रक तक सड़कों पर
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ शहर में कुछ व्यापारी अपनी कार या दुपहिया वाहन से लेकर ट्रकों को दिन भर दुकानों के बाहर सड़कों पर खड़ा रख रहे हैं। इससे आम जनता को असुविधा होती है। लेकिन अपने व्यवसाय के चक्कर में आम जनता को हो रही असुविधा पर किसी तरह का ध्यान नहीं दिया जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रशासन भी इन तमाम अव्यवस्थाओं पर चुप्पी साधे हुए है। (संवाद)
निर्माण कराने के लिए जगह खाली कराने में लग गए पांच दिन
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ शहर में रहने वाले 80 प्रतिशत लोगों के पास अपने वाहन हैं। जबकि केवल दो प्रतिशत लोगों के पास ही व्यक्तिगत पार्किंग की व्यवस्था है। शेष लोग सड़कों पर वाहन खड़े करते हैं। कुछ दिन पूर्व लोक निर्माण विभाग को टकाना में नए निर्माण कार्य के लिए वाहनों के स्वामियों का पता लगाने में पांच दिन का समय लग गया। (संवाद)
बीच सड़क में हो रही है वाहनों की धुलाई
पिथौरागढ़। नगर के टकाना क्षेत्र में वाहनों की धुलाई बीच सड़क पर ही हो रही है। आने जाने वाले लोगों का ध्यान तक नहीं रखा जा रहा है। वाहनों को धोते समय प्रेशर पाइप से लोगों के ऊपर पानी के छींटे गिरते हैं। कई बार राहगीरों को आवाजाही में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। जबकि नियमानुसार सड़कों या पैदल मार्गों में वाहनों को धोना गैर कानूनी है। (संवाद)
पहाड़ के शहरों में फुटपाथ की कोई व्यवस्था नहीं
पिथौरागढ़। पहाड़ के छोटे कस्बे पिथौरागढ़ ने पिछले तीन दशकों में बड़े शहर का आकार ले लिया है। सातशिलिंग से सुकौली, ऐचोली- भड़कटिया वड्डा तक इसका विस्तार हो चुका है। शहर में प्रतिदिन आठ नए मकान बन रहे हैं और छह या सात दोपहिया और चारपहिया नए वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं। 50 हजार वाहन जिले के एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत हैं। इस तरह तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहे शहर में उचित पार्किंग की व्यवस्था तक नहीं है। (संवाद)
सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण करना गलत है। अतिक्रमण हटाने के लिए नगरपालिका के साथ अभियान चलाया जाएगा। नगर की सड़कों और मार्गों में अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नंदन कुमार(आईएएस) उपजिलाधिकारी, पिथौरागढ़।