पिथौरागढ़। विशेष सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने मुनस्यारी में ढाबा संचालक से मारपीट और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने के मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष को दोषी करार देते हुए दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी दरोगा पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह चर्चित मामला वर्ष 2019 का है। मामले के अनुसार उत्तरकाशी जिले के बड़कोट के नगाल गांव (हाल रामपुर, देहरादून) निवासी प्रदीप सिंह चौहान तब थानाध्यक्ष के पद पर तैनात थे। पंचायत चुनाव के दौरान घटना के दिन प्रदीप सिंह चौहान पुलिस कर्मियों के साथ मुनस्यारी स्थित एक कैफे में पहुंचे थे। कैफे में भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली। इस पर वह कैफे संचालक विक्रम सिंह जंगपांगी से नाराज हो गए और बाद में देख लेने की धमकी देकर वहां से चले गए।
अभियोजन के अनुसार उसी रात करीब 10 बजे थानाध्यक्ष दोबारा कैफे के सामने पहुंचे। वहां उन्होंने ढाबा संचालक मनमोहन से क्षेत्र में लड़ाई-झगड़ा होने की सूचना मिलने की बात कही। मनमोहन ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया तो थानाध्यक्ष ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी।
अगले दिन पीड़ित शिकायत करने थाने पहुंचा तो आरोप है कि वहां भी थानाध्यक्ष ने उसके साथ मारपीट की और उल्टा उसका शांति भंग में चालान कर दिया। मारपीट में घायल मनमोहन को पहले सीएचसी, फिर जिला अस्पताल और बाद में हल्द्वानी रेफर किया गया।
कैफे संचालक विक्रम सिंह जंगपांगी ने काफी प्रयास के बाद थानाध्यक्ष के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। करीब सात साल से चल रहे मामले में शुक्रवार को अदालत ने फैसला सुनाया।
विशेष सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और गवाहों के बयान व साक्ष्यों का परिशीलन करने के बाद आरोपी तत्कालीन थानाध्यक्ष को दोषी करार दिया और सजा सुनाई।
कैफे संचालक था निशाने पर, पिट गया ढाबा संचालक
कैफे संचालक विक्रम सिंह जंगपांगी ने न्यायालय में दिए बयान में बताया कि कैफे में भीड़ अधिक होने के कारण थानाध्यक्ष को बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिल पाई थी। इसे उन्होंने अपनी बेइज्जती समझा और वहां से चले गए। आरोप है कि बाद में उन्होंने विक्रम को सबक सिखाने के इरादे से उसके कैफे के सामने पहुंचकर ढाबा संचालक मनमोहन से कैफे में लड़ाई-झगड़ा होने की बात कहलवाने का प्रयास किया।
मनमोहन के ऐसा कहने से इनकार करने पर थानाध्यक्ष ने कथित तौर पर वर्दी का रौब दिखाते हुए उसके साथ मारपीट की। इस तरह विवाद का मूल निशाना कैफे संचालक था लेकिन मारपीट का शिकार ढाबा संचालक हो गया।
वीडियो ने खोला मामला
मामले में घटनाक्रम का वीडियो अहम साक्ष्य साबित हुआ। कैफे संचालक के अनुसार थानाध्यक्ष के कैफे में आने, कुर्सी नहीं मिलने पर नाराज होने और बाद में ढाबा संचालक से मारपीट करने की घटना का किसी व्यक्ति ने वीडियो बना लिया था। आरोप है कि मारपीट के दौरान थानाध्यक्ष ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए खुद को उत्तरकाशी का शेर बताया और पीड़ित को थाने में बंद करने की धमकी दी। वीडियो सामने आने के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और तत्कालीन थानाध्यक्ष के खिलाफ उसी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। यही वीडियो बाद में मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बना।