धारचूला/पिथौरागढ़। भारत-नेपाल का सीमांकन करने वाली काली नदी के कटाव से बचने के लिए तटबंध बनाने का काम शुरू हो गया है। मानसून काल में अब मात्र तीन माह का समय बचा हुआ है। ऐसे में काली के तेज होते बहाव के बीच तटबंध बनाना सिंचाई विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। गर्मी बढ़ने के साथ ही ग्लेशियर पिघलने के कारण काली का जल स्तर बढ़ जाता है।
मानसून काल में काली का प्रवाह अपने चरम पर होता है। नदी लंबे समय से धारचूला क्षेत्र में भू कटाव कर रही है, जिससे धारचूला नगर को खतरा बना हुआ है। पड़ोसी देश नेपाल ने अपनी भूमि को बचाने के लिए मजबूत तटबंध बनाए हुए हैं। नेपाल की ओर बने तटबंधों से टकरा कर काली का बहाव भारतीय क्षेत्र की और बढ़ रहा है। नदी में एक विशाल चट्टान के टूटने से भी भारतीय क्षेत्र की ओर बहाव बढ़ा है। इससे कस्बे पर खतरा बना हुआ है। धारचूला क्षेत्र के लोग वर्ष 2013 की आपदा को भूले नहीं हैं। तब काली नदी से धारचूला से जौलजीबी तक कहर मचा दिया था।
अब तापमान में बढ़ोतरी के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ पिघलने लगी है जिससे नदी का जल स्तर बढ़ने लगा है। बहाव तेज होने के साथ ही तट से लगे संकरे स्थानों में नदी गहरी होने लगी है। आने वाले दिनों में सिंचाई विभाग को बढ़ते जल स्तर की चुनौती से निपटते हुए कार्य करना होगा। तापमान ज्यादा तेजी से बढ़ा तो तटबंध समय से तैयार करने में सिंचाई विभाग को खासी दिक्कत झेलनी पड़ेगी। बता दें कि धारचूला में करीब 77 करोड़ रुपये की लागत से तटबंध का निर्माण किया जाना है। इसके तहत घटखोला और खोतिला में बाढ़ सुरक्षा के कार्य कराए जाने हैं। डीएम ने सिंचाई विभाग को मानसून काल के शुरू होने से पूर्व बाढ़ सुरक्षा के कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। निर्माण कार्य की लगातार निगरानी भी की जाएगी।
नेपाल के मजबूत तटबंध से टकरा कर भारतीय क्षेत्र में काली नदी कर रही है भू-कटाव
पिथौरागढ़। मित्र राष्ट्र नेपाल काली नदी के किनारे कुछ साल पूर्व ही अच्छे मजबूत तटबंधों का निर्माण कर चुका है। गर्मी के मौसम में ग्लेशियर पिघलने के बाद काली नदी अपने प्रचंड वेग में बहती है। काली नदी नेपाल के मजबूत तटबंधों से टकरा कर भारतीय क्षेत्र की ओर बहती है जिस कारण भारतीय क्षेत्र में लगातार भू-कटाव हो रहा है।
मानसूनकाल में हर वर्ष कई हेक्टेअर भूमि लील जाती है काली
पिथौरागढ़। काली नदी में मजबूत तटबंध नहीं होने से धारचूला, जौलजीबी, झूलाघाट सहित कई अन्य छोटे कस्बों को खतरा है। भारी बारिश और आपदा के बाद काली नदी हर साल जून माह से अगस्त माह तक खतरे के निशान से ऊपर बहती है। वह अपने साथ बड़े-बड़े पेड़ों और बोल्डरों को बहाकर चलती है। इस बार जिला प्रशासन काली नदी के बहाव से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पहले से ही तैयारियां कर रहा है।
तटबंध निर्माण का कार्य गुणवत्ता के साथ तेजी से कराने के लिए संबंधित विभाग को निर्देश दिए गए हैं। दो रोज पूर्व स्थल निरीक्षण के बाद कार्य स्थल पर सीसीटीवी लगाने को कहा गया है। सीसीटीवी के जरिये तटबंध निर्माण की मॉनीटरिंग की जाएगी। संबंधित क्षेत्र के एसडीएम तटबंध निर्माण कार्य की समीक्षा करेंगे। सप्ताह में दो दिन जिला स्तर से तटबंध निर्माण की समीक्षा की जाएगी। मानसूनकाल शुरू होने से पूर्व तटबंध निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
-डॉ. आशीष चौहान, डीएम पिथौरागढ़।