पिथौरागढ़। पहाड़ में समस्याएं भी पहाड़ जैसी ही गंभीर हैं। शिक्षा विभाग ने ऐसे विद्यालयों को चिह्नित किया है जिन विद्यालयों के बच्चों संसाधनों के अभाव में जान जोखिम में डालकर खतरनाक नदी, नाले पार कर स्कूल पहुंचते हैं। ज्यादा बारिश होने पर विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित रहता है। इसका असर 205 विद्यालयों के 3075 छात्र-छात्राओं पर पड़ता है।
सीमांत जिला पिथौरागढ़ आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है। हर मानसून काल में अतिवृष्टि या बादल फटने से काफी नुकसान होता है। शिक्षा विभाग ने बिण ब्लाक में 23 ऐसे विद्यालयों को चिह्नित किया है जहां जाने के लिए इन विद्यालयों में पढ़ने वाले 345 बच्चों को परेशानी होती है। इन विद्यालयों में तैनात आठ शिक्षक भी किसी तरह विद्यालय पहुंचते हैं। मूनाकोट ब्लाक में 26 विद्यालयों के 390 छात्र-छात्राएं और 10 शिक्षक, धारचूला में 44 विद्यालयों के 660 छात्र-छात्राएं और 15 शिक्षकों को परेशानी होती है। मुनस्यारी के 32 विद्यालयों के 480 बच्चे और 15 शिक्षक, डीडीहाट के 75 बच्चे दो शिक्षक, गंगोलीहाट के 37 विद्यालयों के 555 बच्चे. 20 शिक्षक, बेड़ीनाग के पांच विद्यालयों के 75 बच्चे और पांच शिक्षक, कनालीछीना के 33 विद्यालयों के 495 बच्चे 20 शिक्षक मानसून काल में जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं।
इनसेट
ऑनलाइन शिक्षण कार्य भी संभव नहीं
पिथौरागढ़। सीमांत जिले के 205 विद्यालय ऐसे हैं जहां संचार की सुविधा नहीं है। ऐसे में इन विद्यालयों में ऑनलाइन शिक्षा देना भी मुश्किल हो जाता है। शिक्षा विभाग ऐसे विद्यालयों में हफ्ते में अलग- अलग शिक्षकों को भेजकर बच्चों को शिक्षण कार्य कराने की तैयारी कर रहा है। संवाद
-
इनसेट कोट-
मानसून काल में 205 विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित ना हो इसके लिए व्यवस्था की जाएगी। जहां नेटवर्क की सुविधा हो ऑनलाइन पढ़ाई की जाएगी। जहां नेटवर्क की सुविधा नहीं है वहां शिक्षकों को भेजा जाएगा। - अशोक कुमार जुकरिया, मुख्य शिक्षा अधिकारी पिथौरागढ़।