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पहाड़वासियों की पीड़ा को महसूस कर पहाड़ को ही बनाया कर्म स्थली

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अस्कोट अस्पताल में मरीज की जांच करती डॉ. आरती कन्याल।संवाद - फोटो : PITHORAGARH
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। जहां एक ओर पहाड़ के कई युवा डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद बाहर चले जा रहे हैं वहीं कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं में पिछड़े पहाड़ वासियों की पीड़ा को देखकर पहाड़ को ही अपनी कर्मस्थली बनाया है। ऐसे ही डॉक्टरों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉ. आरती कन्याल भी शामिल हैं।
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डॉ. आरती मूल रूप से गर्खा की निवासी हैं। उनका परिवार बलुवाकोट में रहता है। उन्होंने हाईस्कूल की पढ़ाई जीजीआईसी धारचूला से और इंटर की पढ़ाई पिथौरागढ़ से की। इसके बाद श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया।
वर्ष 2015 में डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 2017 से अपने गृह जनपद में देने का निर्णय लिया और पिछले चार सालों से अस्कोट अस्पताल में सेवा दे रहीं हैं। अपने व्यवहार और हर समय मरीजों की सेवा से डॉ. आरती स्थानीय लोगों की चहेती बन गईं हैं। क्षेत्र के असहाय लोगों की मदद हो या चिकित्सकीय परामर्श वह हर समय इसके लिए तैयार रहतीं हैं।
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डॉ. आरती कहती हैं कि पहाड़ में चिकित्सा सुविधा का काफी अभाव है। मरीज बड़ी उम्मीद लेकर अस्पताल आते हैं। यहां के अधिकांश मरीजों के पास बड़े अस्पतालों तक जाने के लिए टिकट तक के लिए पैसे नहीं होते हैं। जनता की इस पीड़ा को देखते हुए उन्होंने पीजी करने का विचार भी छोड़ दिया है।
गंभीर मरीजों के उपचार में करती हैं मदद
अस्कोट। अस्कोट के सलमगांव निवासी डमर सिंह लुंठी की हड्डी में टीबी की बीमारी थी। डॉ. आरती को जब इसका पता चला तो उन्होंने हल्द्वानी के चिकित्सकों से बात कर उसका उपचार करवाया। अब वह ठीक हैं।
कांग्रेस नेता प्रदीप पाल, सामाजिक कार्यकर्ता बिक्रम सिंह पाल, प्रकाश पाल राज्य आंदोलनकारी गोविंद सिंह रावत, नारायण दत्त पंत, तनुज पाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य विकास भंडारी आदि लोगों का कहना है कि पहले यहां आने वाले डॉक्टर चार-पांच महीने में ही अपना स्थानांतरण करवा लेते थे लेकिन डॉ. आरती के यहां लगातार सेवाएं देने से क्षेत्र की जनता को बड़ी राहत मिली है।
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