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बारहमासी बनने के बाद भी सीमांत की जीवनरेखा को बाधित कर रहीं दरकती पहाड़ियां

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Danger in All Weather Road Pithauragarh - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग के घाट से लेकर पिथौरागढ़ तक के हिस्से को सीमांत जिले की लाइफ लाइन कहा जाता है। इसका कारण यह है कि यही सड़क पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से लेकर चीन और नेपाल से सटे धारचूला को मैदानी क्षेत्रों से जोड़ती है। 30 किलोमीटर लंबी पिथौरागढ़-घाट सड़क अब बारहमासी बन चुकी है। इसके बावजूद दरकती पहाड़ियों के कारण सीमांत की इस जीवनरेखा के बरसात में बंद होने का क्रम नहीं थमा है। पिछले साल मलबा आने से 20 से अधिक बार सड़क में यातायात ठप होने से पिथौरागढ़ का शेष जगत से संपर्क कट गया था।
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पिथौरागढ़ से टनकपुर की दूरी 150 किमी जबकि हल्द्वानी की दूरी 210 किमी है। टनकपुर से पिथौरागढ़ तक 1100 करोड़ की लागत से वर्ष 2017 में बारहमासी सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ। लगभग डेढ़ सौ किमी लंबी इस सड़क में केवल घाट से लेकर पिथौरागढ़ तक 30 किमी हिस्सा पिथौरागढ़ जिले में आता है। एनएच खंड लोहाघाट की ओर से वर्ष 2021 में सड़क की कटिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। चंपावत जिले के च्यूरानी नामक स्थान से लेकर पिथौरागढ़ के एंचोली तक लगभग 36 किमी बारहमासी सड़क निर्माण में 199.08 करोड़ रुपये खर्च हुए। बारहमासी बनने के बाद उम्मीद थी कि हर मौसम में सड़क में वाहन दौड़ते रहेंगे लेकिन घाट के पास स्थित दिल्ली बैंड और मटेला गांव के निकट स्थित चुपकोट बैंड की पहाड़ियों के दरकने से सड़क के बार-बार बंद होने की समस्या पैदा हो गई है। दिल्ली बैंड में सड़क के सरयू नदी में समा जाने से चट्टान को काटकर नई सड़क बनानी पड़ी थी। अब तक पुरानी सड़क से 30 मीटर भीतर तक कटाव हो चुका है। अभी भी इस स्थान पर नीचे से सड़क के ऊपर से पहाड़ी के दरकने का खतरा बना हुआ है। इन स्थानों पर हालात यह हैं कि वर्ष 2021 में मार्च से लेकर अक्तूबर तक 20 से अधिक बार मलबा और बोल्डर आए थे। जून में इस जीवनरेखा में तीन दिन तक यातायात पूरी तरह से ठप रहा था। ऐसे में सब्जी, दूध, रसोई गैस, समाचार पत्र, डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति भी ठप हो गई थी।
बारहमासी बनने के बाद पिथौरागढ़ से घाट तक साफ मौसम में जहां यातायात बेहद सुगम रहता है वहीं बारिश होते ही चुपकोट बैंड और दिल्ली बैंड की पहाड़ियों से मलबा और बोल्डर गिरने शुरू हो जाते हैं। यह दोनों स्थान सबसे खतरनाक और संवेदनशील बने हुए हैं। इन स्थानों पर भूस्खलन के कारण सुरक्षा दीवारें भी नहीं बन पाई हैं। क्रस बैरियर न लगने से दुर्घटना का भी खतरा बना है। बरसात का समय बेहद निकट है और सीमांत जिले में प्री मानसून बारिश से भी भूस्खलन का खतरा बना रहता है।
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साफ मौसम में भी गिरते रहते हैं पत्थर
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़-घाट बारहमासी सड़क में शहर से 14 किमी की दूरी पर स्थित गुरना तक पहाड़ी दरकने का अधिक खतरा नहीं है लेकिन गुरना से लेकर घाट तक सड़क संवेदनशील है। खड़ी चट्टानों को काटकर बनाई गई बारहमासी सड़क में साफ मौसम में भी पहाड़ियों से छोटे-छोटे पत्थर गिरते रहते हैं। चुपकोट बैंड और दिल्ली बैंड में पत्थरों के गिरने का अधिक खतरा रहता है। इससे आए दिन हादसे होते रहते हैं। एक सप्ताह पूर्व निर्वाचन विभाग की कार के बोनट में भारी भरकम पत्थर गिर गया था, जिसमें कार सवार अधिकारी और चालक बाल-बाल बच गए थे।
बारहमासी सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। आपदा के कारण काफी व्यवधान पैदा हुआ था। अभी कई स्थानों पर भूस्खलन से ध्वस्त दीवारों का निर्माण होना है। चुपकोट, दिल्ली और टिम्टा बैंड में सुरक्षा दीवारों का निर्माण होना है। बरसात में सड़क बंद होने की स्थिति में मशीनें और उपकरण मौके पर रखे जाएंगे। -बीएल चौधरी, एई एनएच खंड, पिथौरागढ़।
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