यहां प्राचीन बालेश्वर मंदिर के लिए खतरा बने आम के पेड़ को काटने में अब वन निगम टालमटोल करने लगा है। पेड़ की एक शाखा गिरने से दो वर्ष पूर्व मुख्य मंदिर के मुख मंडल को नुकसान पहुंचा था।
उसी समय वन विभाग ने पेड़ पर घन लगाकर उसे काटने की अनुमति दे दी थी। दो वर्ष से पेड़ को काटा नहीं गया। अब वन निगम के अधिकारी पेड़ को उपयोगी, फलदार और हरा बताकर काटने से इंकार कर रहे हैं।
वन विकास निगम के लौंगिंक प्रबंधक डीएन दास ने मंदिर कमेटी को पत्र लिखकर कहा है कि पेड़ से मंदिर को कोई खतरा नहीं है।
इधर, मंदिर कमेटी के अध्यक्ष गिरीश चंद्र भट्ट का कहना है कि आम के इस पेड़ में फल नहीं आते। उसकी जड़ें खोखली हो गई हैं और यह किसी भी वक्त गिरकर मंदिर के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
एक बार यह पेड़ मंदिर को नुकसान पहुंचा चुका है। जब पेड़ को काटने के लिए घन लगाया जा चुका है तो उसे काटने में क्या दिक्कत है।
मंदिर कमेटी के सदस्यों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पेड़ से मंदिर को कोई नुकसान पहुंचता है तो उसकी जिम्मेदारी वन निगम की होगी।