पिथौरागढ़। सीमांत के एकमात्र महिला अस्पताल में पिछले छह माह में 1278 बच्चों ने जन्म लिया है। इनमें 649 लड़के और 629 लड़कियां शामिल हैं। इस अस्पताल में जिलेभर के साथ ही नेपाल से भी गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए पहुंचतीं हैं।
महिला अस्पताल की स्थापना वर्ष 1962 में हुई। जनसंख्या के आधार पर उस समय अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं थीं। जनसंख्या बढ़ने के साथ अस्पताल पर धीरे-धीरे रोगियों का भार बढ़ने लगा है। यहां नेपाल से भी बड़ी संख्या में रोगी पहुंचते हैं। सीमांत जिले में प्रतिदिन 120 से अधिक ओपीडी हो रही है।
पिछले छह माह में अस्पताल में 1017 सामान्य प्रसव और 383 प्रसव सीजेरियन किए गए। अस्पताल में हर माह प्रसव और अन्य रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके बाद भी अस्पताल में संसाधन नहीं बढ़ाए जा रहे हैं।
अस्पताल प्रबंधन को बरामदे में ही बेड लगाकर प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को भर्ती करना पड़ रहा है। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को किसी तरह की परेशानी होने पर जिला स्तर पर उपचार की बेहतर सुविधा न होने से हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। पिथौरागढ़ से हल्द्वानी की अधिक दूरी के कारण समय पर उपचार न मिलने से रेफर किए गए अधिकतर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
अस्पताल में उपचार के लिए लगी लंबी भीड़
पिथौरागढ़। महिला अस्पताल संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। इस कारण अस्पताल उपचार के लिए आए रोगी और अस्पताल स्टाफ परेशान है। बच्चों को टीके लगाने या अन्य उपचार कराने के लिए लोगों को लंबी लाइन लगाकर इंतजार करना पड़ता है। रोगियों की भीड़ बढ़ने के कारण रोगियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में हर रोज बड़ी संख्या में रोगी आ रहे हैं। संसाधनों की कमी के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में मौजूद हर सुविधा का लाभ रोगियों और तीमारदारों को दी जा रही है।
- डॉ. जेएस नबियाल, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, महिला अस्पताल पिथौरागढ़।
पिथौरागढ़ जिला महिला अस्पताल में पिछले छह माह में पैदा हुए 1278 बच्चे
माह लड़का लड़की कुल
अप्रैल 82 87 169
मई 95 108 203
जून 98 98 196
जुलाई 98 96 194
अगस्त 123 112 235
सितंबर 153 128 281
कुल 649 629 1278