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पिथौरागढ़ आपदा: कोरोना से बचने को गांव आए थे भाई-बहन, कुदरत के कहर ने कर दिया जिंदा दफन

Tue, 21 Jul 2020 11:33 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संजू पंत, अमर उजाला, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़ में तबाही - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में आई आपदा में मृतक दो भाई बहन कोरोना से बचने को गांव आए थे, पर मौत से नहीं बच पाए। अगर स्कूल खुले होते तो टांगा गांव के दो मासूम मलबे में दफन होने की जगह अन्य बच्चों की तरह उछल-कूद रहे होते। पर इन बच्चों को क्या पता था कि जिस महामारी से अपनी जान बचाने के लिए गांव आए हैं, वहां आपदा के नाम पर मौत मुंह खोले उनका इंतजार कर रही है। अब गांव में उनकी यादें ही बाकी हैं।  
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पिथौरागढ़ में तबाही - फोटो : अमर उजाला
रविवार देर रात हुई भारी बारिश से बंगापानी तहसील के टांगा गांव में जो 11 लोग लापता हो गए थे उनमें गणेश सिंह के दो बच्चे दिव्यांश और लतिका (लक्की) भी शामिल हैं। गणेश सिंह ने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए मदकोट में किराए पर कमरा लिया था ओर वहीं पर दोनों अपने माता-पिता के साथ रहते थे।
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पिथौरागढ़ में तबाही - फोटो : अमर उजाला
कोरोना के कारण स्कूल बंद हुआ तो दोनों बच्चे अपने माता-पिता के साथ गांव टांगा आ गए। इससे पहले वह कभी कभार ही स्कूल में छुट्टियां पड़ने पर गांव आते थे, लेकिन इस बार मार्च से ही गांव में थे। गांव में संचार सुविधा नहीं थी तो ऑनलाइन पढ़ाई भी बंद थी।

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मुनस्यारी में तबाही - फोटो : अमर उजाला
ऐसे में दोनों बच्चे खुद ही पढ़ते थे फिर सभी बच्चों की तरह शाम को खेलकूद कर सो जाते। रविवार रात आए सैलाब में मकान ढहा तो परिवार के अन्य सदस्यों के साथ दोनों मासूम भी मलबे में दब गए।
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मुनस्यारी में तबाही - फोटो : अमर उजाला
दोनों बच्चों को भी नहीं पता रहा होगा कि उनके साथ यह हादसा होगा, जब मलबे से इन मासूमों की फ्रेम की हुई फोटो निकली तो ग्रामीणों के साथ राहत एवं बचाव कार्य में लगे एसडीआरएफ के जवानों की आंखें भी नम हो गईं।  
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