सोमवार से हो रही बारिश से तवाघाट-सोबला सड़क का 20 मीटर हिस्सा छिरकिला बांध में समा गया है। सड़क बंद होने से सोबला, कंज्योती, तेजम, नारायण आश्रम जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कैलास मानसरोवर यात्रा पर जा रहे पांचवें दल के शेड्यूल में बदलाव करना पड़ा। यात्रियों को नारायण आश्रम के स्थान पर पांगला-मांगती होते हुए गाला पड़ाव भेजना पड़ा। सड़क बंद होने से लगातार दो दलों के लिए ऐसी व्यवस्था करनी पड़ी है। तवाघाट से कंज्योति, नारायण आश्रम, सोबला जाने वाली सड़क वर्ष 2013 की आपदा से प्रभावित है। सड़क के ऊपरी हिस्से में भारी मात्रा में मलबा, बोल्डर जमा हैं, जिससे सड़क बंद होने का खतरा हमेशा रहता है।
थल-मुनस्यारी सड़क में कई दिनों के बाद मंगलवार को डेढ़ घंटे के लिए बड़े वाहनों की आवाजाही हुई। सोमवार से हरड़िया नाले के दोनों ओर करीब 15 बड़े वाहन फंसे थे, जिनमें दो वाहन आईटीबीपी के थे। सुबह 11 बजे से बड़े वाहनों की आवाजाही शुरू हुई। 12:30 बजे नाले में फिर मलबा आ गया, सड़क बह गई। लोनिवि का डोजर मौके पर लगातार काम कर रहा है। छोटे वाहनों के लिए भी सड़क थोड़ी देर खुलती है, फिर बंद हो जाती है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक धारचूला के खेत, धामीगांव में बाढ़ सुरक्षा के कामों को क्षति पहुंची है। भैंसकोट, गूटी, राथी, कोटा, सेंणराथी, होकरा को जोड़ने वाली सड़कें नहीं खुली हैं।
आपदा प्रबंधन विभाग के पास इन सड़कों के साथ ही कैलास-मानसरोवर यात्रा मार्ग बंद होने तक की सूचना नहीं है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी आरएस राणा से सड़कों के बंद होने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि थल-मुनस्यारी सड़क के अलावा सारी सड़कें खुली हैं। सोबला समेत आंतरिक सड़कों के बंद होने की बात जब उन्हें बताई गई तो उनका कहना था कि आंतरिक सड़कों का ब्यौरा उनका विभाग नहीं रखता है। राणा ने बारिश से अन्य किसी नुकसान से इनकार किया है।