बंगापानी (पिथौरागढ़)। नौ वर्ष पहले दारमा और मदरमा गांवों को सड़क मार्ग से जोड़ दिया गया। 5.50 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद यह विकास फाइलों में फला-फूला लेकिन आम लोगों के हिस्से नहीं आया। पुल के पास गड्ढा, लगातार मलबा गिरना और महीनों तक अवरुद्ध मार्ग रहना इसकी पहचान बन गया। इस बार अधिकारियों की मेहरबानी से सड़क खुली तो इतनी संकरी रह गई कि टैक्सी चलाना मुश्किल है। लोग पैदल सफर करने को मजबूर हैं।
बंगापानी तहसील के दूरस्थ गांव दारमा के लिए चार और मदरमा के लिए 1.50 करोड़ रुपये से वर्ष 2016 में बनी ये सड़कें शुरुआत से मुसीबतों से घिरी रहीं। इस साल अक्तूबर में अधिकारियों को इसकी याद आई। सड़कों के गड्ढे भरे गए। मलबा हटाकर रास्ता खोला गया। करोड़ों रुपये खर्च कर बनी इन सड़कों पर जगह-जगह संकरे मोड़ हैं। इतने टूटे-फूटे रास्ते हैं कि वाहनों की आवाजाही लगभग नामुमकिन बनी हुई है।
बड़े वाहन इन पर नहीं जा सकते। छोटे वाहनों को कई बार आगे-पीछे करके किसी तरह निकाला जा रहा है जिससे दुर्घटना का खतरा हर मोड़ पर मंडरा रहा है। ड्राइवर इन मार्गों पर वाहन चलाने से कतराने लगे हैं। टैक्सी मालिक इन सड़कों पर वाहनों का संचालन करने से हाथ पीछे खींच रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों को पैदल सफर करने के लिए विवश हैं। प्रधान अनिल दुबरिया, पूर्व प्रधान चंद्र सिंह धामी, पूर्व बीडीसी सदस्य विजय कुमार आदि ने जल्द सड़क ठीक न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
मरीज डोली में...बराती पैदल
बीमारों और गर्भवतियों को अस्पताल ले जाने में भी डोली ही सहारा बनी हुई है। गांवों में शादी-ब्याह का दौर चल रहा है, लेकिन सड़क की बदहाली ने खुशी में भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दूल्हा–दुल्हन और बराती पैदल ही रास्ता तय कर रहे हैं।
बोले लोग
करोड़ों रुपये खर्च होने का लाभ हमें आज तक नहीं मिल पाया है। सिर्फ सड़क काटकर खानापूर्ति कर दी है। इस रास्ते में खतरा अधिक होने से चालक वाहनों का संचालन नहीं कर रहे हैं।
- चतुर सिंह धामी, मदरमा
हमारे गांवों तक बनी सड़कों से गुजरना खतरनाक लगता है। टैक्सी का संचालन मुश्किल हो रहा है और हम पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। दोनों सड़कों को ठीक करना चाहिए। - जसपाल सिंह, दारमा
कोट
दारमा और मदरमा की सड़क को पूरा ठीक करने में समय लगेगा। जहां-जहां दिक्कत है वहां सड़क दुरुस्त कराई जाएगी। -सुमित जोशी, जेई, लोनिवि, डीडीहाट