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Pithoragarh News: मौत बन झांक रहे हैं बोल्डर, खाई में लटक रही है जिंदगी

Fri, 12 Sep 2025 10:36 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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 धारचूला-तवाघाट-गुंजी मोटर मार्ग पर इस तरह लटक रही हैं चट्टानें। संवाद
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में सड़कों का जाल तो बिछा दिया गया है। ऑलवेदर के साथ ही चीन सीमा तक सड़कों का निर्माण हुआ है। अधिकांश गांवों तक सड़कें पहुंची हैं। पहाड़ियों को बेतरतीब तरीके से काटकर इन सड़कों को धरातल पर उतारा गया है। हैरानी है कि इनके निर्माण में सुरक्षा की पूरी तरह अनदेखी की गई। नतीजतन दुर्गम जिले की अधिकांश सड़कों में पहाड़ियों पर बोल्डर मौत बनकर झांक रहे हैं तो खाई में जिंदगी लटकी है। कब पहाड़ी दरक जाए और कब खाई जीवन अपने साए में खींच ले, इसका कोई पता नहीं। जिले ही छह लाख की आबादी हर रोज इन सड़कों पर जान जोखिम में आवाजाही कर रही है।
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सीमांत और दुर्गम जिले में विकास के दावे कर घाट-पिथौरागढ़ ऑलवेदर, चीन सीमा तक पहुंच बनाने के लिए तवाघाट-लिपुलेख और मुनस्यारी-मिलम सड़क का निर्माण किया गया है। जिले के अधिकांश गांवों को जोड़ने के लिए करीब 250 से अधिक सड़कें अस्तित्व में हैं। इन सड़कों का निर्माण कर वाहवाही तो लूटी गई लेकिन इनमें सुरक्षा की पूरी तरह अनदेखी हुई है। बगैर तकनीकी जांच के ही अनियोजित तरीके से पहाड़ियों को काटकर इन सड़कों का निर्माण किया गया है। जिले की प्रमुख सड़क घाट से पिथौरागढ़, धारचूला से गुंजी, मुनस्यारी से मिलम, थल से मुनस्यारी, सातसिलिंग से थल तक जगह-जगह अनियोजित कटान से कमजोर हो चुकी पहाड़ियों के ट्रीटमेंट की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया।
ग्रामीण सड़कों के भी यही हाल हैं। नतीजतन ये पहाड़ियां लगातार दरक रहीं हैं और इन पर लटके बोल्डर काल बनकर गिर रहे हैं। क्रैश बैरियर, पैरापिट सहित अन्य सुरक्षात्मक कार्यों के नाम पर औपचारिकता निभाने से नीचे की तरफ बनीं खाईं किसी दुर्घटना का इंतजार कर रही हैं। इन सड़कों पर लंबे समय तक आवाजाही बंद रही और सिस्टम पर सवाल उठने शुरू हुए तो अब इन पहाड़ियों की तकनीकी जांच कर स्थायी ट्रीटमेंट के प्रयास करने की बात कर जिम्मेदारी पर पर्दा डाला जा रहा है।
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अधिकांश ग्रामीण सड़कें संकरी, दुर्घटना का खतरा अधिक
जिले में पूर्व में कटी हों या वर्तमान में बन रहीं ग्रामीण सड़कों की चौड़ाई बेहद कम है। कनालीछीना-गोवत्सा, कनालीछीना-पीपली, नाचनी-भैंसकोट, सुवालेख-रसैपाटा, देवलथल-उड़ई, गंगोलीहाट-दशाईथल, थल-पांखू सहित अन्य प्रमुख ग्रामीण सड़कें संकरी हैं। इन सड़कों पर सुरक्षा के लिए क्रैश बैरियर का अभाव होने से हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। वर्तमान में जिन सड़कों का निर्माण किया जा रहा है ये भी अनियोजित तरीके से और सुरक्षा की अनदेखी कर ही बनाई जा रही हैं। इन सड़कों पर बोल्डर और मलबा गिरने से ये आए दिन बंद हो रही हैं और ग्रामीण पैदल चलने के लिए मजबूर हैं।
बोले ग्रामीण
हमारे क्षेत्र में अधिकांश सड़कों पर आए दिन पहाड़ी से बोल्डर और मलबा गिरता है। आए दिन ये सड़कें बंद होती हैं और पैदल चलना मजबूरी बनता है। इन सड़कों पर आवाजाही करने में भी खतरा अधिक है। - कैलाश सिंह, बंगापानी
हमारे क्षेत्र के लिए काटी गई गोवत्सा सड़क पर पहाड़ी पर लटके बोल्डरों से खतरा बना है। कई बार लटके बोल्डरों को हटाने की मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सिस्टम किसी घटना का इंतजार कर रहा है। - हरीश चंद्र, गोवत्सा
बोले यात्री
तवाघाट-गुंजी सड़क पर पहाड़ी पर लटके बोल्डर मौत बनकर झांक रहे हैं। ऊपरी क्षेत्र से तहसील मुख्यालय पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। कब पहाड़ी दरक जाए कोई भरोसा नहीं है। - केशर सिंह, धारचूला।
ऑलवेदर सड़क के बुरे हाल हैं। दिल्ली बैंड के पास लगातार पहाड़ी दरक रही है। इससे खतरा बना है। इस सड़क पर आवाजाही करना खतरा मोल लेना है। अल्मोड़ा से बमुश्किल जिला मुख्यालय पहुंच सका। - चंद्र बल्लभ, रई
बोले मंत्री
विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच पहाड़ी क्षेत्र में आवाजाही सुगम बनाने के लिए सड़कों का निर्माण किया गया है। पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन होता है। ऑलवेदर, चीन सीमा को जोड़ने वाली सड़कों सहित अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने डेंजन जोनों का केंद्र की टीम से तकनीकी सर्वेक्षण कराने की तैयारी है। ऐसा इसलिए कि इन डेंजर जोन का स्थायी ट्रीटमेंट कर पर्वतीय प्रदेश के लोगों की आवाजाही सुगम हो सके। ट्रीटमेंट के लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी। सड़कों पर सुरक्षात्मक कार्य भी होंगे। दुर्गम प्रदेश में सड़कों को बेहतर बनाया गया है। - अजय टम्टा, केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राज्य मंत्री
बोले अधिकारी
टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑलवेदर सड़क पर बने कई डेंजर जोन का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। सुरक्षात्मक कार्य भी किए जा रहे हैं। इसके लिए नए प्रस्ताव भी भेजे गए हैं। सड़कों को बेहतर बनाकर आवाजाही सुगम बनाने का गंभीरता से प्रयास हो रहा है। - दीपक जोशी, ईई, एनएच, लोहाघाट
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