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जिले में 34 आयुर्वेदिक अस्पताल किराए के मकानों में

Tue, 28 Feb 2017 10:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़/थल
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किराए के मकान में चल रहा आयुर्वेदिक अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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पिथौरागढ़ जिले में राजकीय आयुर्वेदिक अस्पतालों की संख्या 57 है, लेकिन इनमें से 34 अस्पताल किराए के मकानों में संचालित हो रहे हैं। जिला मुख्यालय के अस्पताल के पास भी अपना भवन नहीं है। थल में जिस मकान में आयुर्वेदिक अस्पताल चल रहा है उसकी हालत बेहद जर्जर हो गई है। सीलन के कारण दवाओं के खराब होने का खतरा रहता है। थल का आयुर्वेदिक अस्पताल 1960 में खुल गया था। तब से लेकर अब तक यह अस्पताल किराए के मकान में ही चल रहा है।
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जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डा. जीसीएस जंगपांगी का कहना है कि कुछ अस्पतालों के अपने भवन हैं, लेकिन ज्यादातर अस्पताल किराए के मकानों में ही चल रहे हैं। सरकार ने अस्पताल भवनों के निर्माण के लिए जमीन की तलाश करने और संभव हो तो गांवों में ही बना बनाया मकान खरीदने की नीति भी तैयार की है, लेकिन ग्रामीण अंचलों में लोग जमीन और मकान बेचने को तैयार नहीं रहते। उन्होंने कहा कि फिर भी विभाग अपने स्तर से प्रयास कर रहा है। इधर, सबसे खास बात यह है कि जिला आयुर्वेदिक अधिकारी का कार्यालय भी किराए के मकान में चल रहा है। जिला मुख्यालय में इस कार्यालय को संचालित करने के लिए अब तक भवन नहीं मिल पाया।

अस्पताल भवन न बनना चिंतनीय
थल के समाजसेवी दान सिंह बिष्ट का कहना है कि आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रति लोगों का रुझान बढ़ रहा है। भवन न होने के कारण पंचकर्म की यूनिट स्थापित नहीं हो पा रही है। सरकार तत्काल अस्पताल भवन का निर्माण करे और लोगों को चिकित्सा की सुविधा दे। उन्होंने कहा कि 57 वर्ष में अस्पताल भवन न बनना चिंता का विषय है।
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चिकित्सा के लिए ज्यादा बजट दिया जाए
थल निवासी नवीन चंद्र पाठक का कहना है कि सरकार को चिकित्सा के लिए ज्यादा बजट देना चाहिए। बजट मिलने पर भवनों का निर्माण भी हो जाएगा और लोगों को सुविधा मिलने लगेगी। उन्होंने कहा कि थल में आयुर्वेदिक अस्पताल के भवन को जल्दी बनाए जाने की जरूरत है। इससे कर्मचारियों को काम करने में आसानी होगी।
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