अस्कोट (पिथौरागढ़)। पाल राजाओं की राजधानी रहे अस्कोट कस्बे में सफाई व्यवस्था के इंतजाम तक नहीं हैं। यहां की सफाई व्यवस्था व्यापारियों के चंदे से चल रही है। सफाई के नाम पर पिछले पांच सालों में जिला पंचायत से भी केवल छह हजार रुपये मिले हैं।
जो कस्बे नगरपालिका में नहीं आते हैं उन कस्बों की सफाई व्यवस्था का जिम्मा जिला पंचायत का होता है। अस्कोट बाजार की सफाई के लिए कोई स्वच्छक तैनात नहीं है। पांच-छह वर्षों से व्यापार संघ अध्यक्ष टिकेंद्र पाल की पहल पर व्यापारी चंदा एकत्र करते हैं इसी राशि से सफाई की जाती है।
अध्यक्ष ने बताया कि सफाई व्यवस्था का दायित्व जिला पंचायत का है। पिछले पांच सालों में सफाई के लिए केवल छह हजार रुपये ही मिले हैं। कोरोना के बाद व्यापार चौपट होने से कुछ ही व्यापारियों की ओर से सफाई कार्य में सहयोग मिल पाता है। कई बार वह स्वयं के खर्च पर कूड़े का निस्तारण करा चुके हैं।
व्यापार संघ ने कराया कूड़े का निस्तारण
अस्कोट (पिथौरागढ़)। छह माह पहले अस्कोट बाजार सहित अन्य स्थानों पर बड़ी संख्या में कूड़ेदान लगाए गए थे। लोगों से दुकानों और घरों का कूड़ा कूड़ेदान में डालने की अपील की गई थी। इसके बाद कूड़ेदान कूड़े से भर गए थे। सफाई की कोई व्यवस्था नहीं होने से कूड़ेदानों से दुर्गंध उठने लगी थी। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
अमर उजाला ने सात मई के अंक में इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद व्यापार संघ अध्यक्ष टिकेंद्र पाल ने अपने संसाधनों से कूड़े का निस्तारण कराया। इससे लोगों ने राहत की सांस ली है। अध्यक्ष पाल अब तक अपने प्रयास से तीन बार कूड़े का निस्तारण करा चुके हैं। संवाद