अधिकतर अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन न होने, बदहाल संचार सेवा और संसाधनाें के अभाव में ऑनलाइन पढ़ाई के कारगर नहीं होने पर विनय ने कोरोना काल में घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाने का निर्णय लिया।
कोरोना काल में विद्यालय बंद होने से पठन-पाठन में आ रही परेशानी को देखते हुए राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय धारचूला के शिक्षक विनय कुमार पांडे ने घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाया। वह रोज उबड़-खाबड़ रास्तों पर सात किमी चलकर बच्चों को पढ़ाने के लिए पहुंचते थे। उन्होंने अपने बच्चों के साथ ही अन्य स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई पर भी ध्यान दिया।
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अधिकतर अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन न होने, बदहाल संचार सेवा और संसाधनाें के अभाव में ऑनलाइन पढ़ाई के कारगर नहीं होने पर विनय ने कोरोना काल में घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाने का निर्णय लिया। वह करीब चार से पांच घंटे छात्रों को देते थे। उन्होंने ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़े बच्चों का गृह कार्य भी जांचा। इस तरह स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की नियमित पढ़ाई तो होती ही रही, अभिभावकों से भी संपर्क बना रहा। वह बताते हैं कि घर-घर जाने का उन्हें अच्छा नतीजा मिला। बच्चों में पढ़ने और लिखने की प्रवृति बनी रही और स्कूल खुलने पर बच्चों को ऑफलाइन कक्षाओं में ढलने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई।