पिथौरागढ़। कई राज, रहस्य और धार्मिक इतिहास सहेजे कुमाऊं के मंदिरों में खंडित प्राचीन मूर्तियां अब संग्रहालयों में संरक्षित होंगी। पुरातत्व विभाग ने यह निर्णय लिया है ताकि इन मूर्तियों के जरिये कुमाऊं के प्राचीन इतिहास और धार्मिक विरासत को सहेजा जा सके। विभाग के मुताबिक आठवीं से 16 वीं सदी की 200 से अधिक खंडित मूर्तियां कुमाऊं के मंदिरों में मौजूद हैं।
पुरातत्व विभाग के मुताबिक कुमाऊं के छह जिलों में स्थापित मंदिरों में दुर्लभ शिवलिंग, ब्रह्मा, विष्णु, शिव, पार्वती, सूर्य, लक्ष्मी, नारायण, महिषासुर मर्दिनी, मानव मुखी गरुड़ सहित अन्य देवी-देवताओं की 200 से अधिक मूर्तियां खंडित हैं जो कई पुरातात्विक राज, रहस्य और धार्मिक विरासत सहेजे हैं। विभाग ने सभी मूर्तियों का चिह्नीकरण कर लिया है। जल्द ही इन मूर्तियों को अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ संग्रहालयों में संरक्षित किया जाएगा। इनके जरिए लोग कुमाऊं की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नजदीक से जान सकेंगे। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक ये प्राचीन और ऐतिहासिक मूर्तियां पर्यटकों को भी अपनी तरफ आकर्षित करेंगी। संवाद
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खंडित मूर्तियों के पूजन का नहीं है विधान
पिथौरागढ़। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खंडित मूर्तियों के पूजन का विधान नहीं है। ऐसे में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण इन मूर्तियों को पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन लेने का निर्णय लिया है। संबंधित क्षेत्र के लोगों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से विभाग खंडित मूर्तियों को संग्रहालय पहुंचाएगा। पूर्व में भी विभाग ने कुछ खंडित मूर्तियों को संग्रहालय में स्थापित किया है।
नदियों को दूषित होने से बचाना भी उद्देश्य
पिथौरागढ़। भले ही खंडित मूर्तियों का विधान नहीं है, लेकिन आम लोगों को इनके ऐतिहासिक महत्व की जानकारी भी नहीं होती। धार्मिक परंपराओं के अनुसार खंडित मूर्तियों को पवित्र नदियों में विसर्जित किया जाता है इससे नदियों के दूषित होने की संभावना बढ़ती है। वहीं ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व भी समाप्त होता है। प्राचीन खंडित मूर्तियों को संग्रहालयों में संरक्षित करने का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व के साथ ही नदियों को दूषित होने से बचाना भी है।
कोट
कुमाऊं में 200 से अधिक खंडित मूर्तियां हैं जो ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से इन ऐतिहासिक धरोहरों को संग्रहालयों में संरक्षित करने के लिए सहयोग की अपील है। विभाग कुमाऊं भर में खंडित प्राचीन मूर्तियों को अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ संग्रहालय में संरक्षित करेगा। इनके जरिए हम अपने प्राचीन इतिहास और धार्मिक परंपराओं को सहेज सकेंगे। - डॉ. चंद्र सिंह चौहान, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, अल्मोड़ा।