धारचूला(पिथौरागढ़)। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तवाघाट-गुंजी हाईवे पर कुलागाड़ में बना नया बेली ब्रिज सिर्फ सात दिन बाद ही अतिवृष्टि की भेंट चढ़ गया। उफनते नाले में 170 मीटर का बेली ब्रिज तिनके की तरह बहकर काली नदी में नेपाल की तरफ पहुंच गया। पुल टूटने से चीन सीमा के साथ ही दारमा, व्यास और चौदास घाटी का संपर्क पूरी तरह से कट गया है। ऐसे में 35 गांवों की 30 हजार से अधिक की आबादी के साथ सीमा सुरक्षा में तैनात सैनिकों की दिक्कत बढ़ गई है।
चीन सीमा के साथ ही तीनों घाटियों को जोड़ने वाली तवाघाट-गुंजी सड़क पर कुलागाड़ में बना बेली ब्रिज बीते 18 अगस्त को पहाड़ी से बोल्डर गिरने से ध्वस्त हो गया था। बीआरओ ने बमुश्किल बीते चार सितंबर को 170 मीटर स्पान का बेली ब्रिज तैयार कर चीन सीमा के साथ ही तीनों घाटियों का संपर्क बहाल कराया।
बीते शुक्रवार रात अतिवृष्टि से फिर से बेली ब्रिज उफनती कुलागाड़ में तिनके की तरह बहकर काली नदी के जरिए नेपाल की सीमा में पहुंच गया। हिलवेज के महेंद्र परिहार, गणेश धामी और गोविंद कार्की ने रात को ही इसकी सूचना प्रशासन को दी। एसडीएम आशीष जोशी ने टीम को रवाना किया। तेज बारिश और सड़क बंद होने से टीम को आधे रास्ते से वापस लौटना पड़ा। जब दूसरे दिन टीम मौके पर पहुंची तो पुल का नामोनिशान मिट चुका था।
इन गांवों का संपर्क पूरी तरह कटा
पुल के अवशेष काली नदी में नेपाल की तरफ पड़े मिले। इस पुल के बहने से एलागाड़, जुम्मा, खेला, तवाघाट स्यांकुरी, गर्गुवा, छिरकिला खिमसुवा, सोबला, दर,उमचिया,पांगला, जयकोट, गस्कू, जिप्ती और गाला सहित दारमा, चौदास और व्यास घाटियों के सभी गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। सड़क के दोनों तरफ बड़ी संख्या में लोग फंस गए हैं। चीन सीमा पर चौकियों में भी आपूर्ति ठप हो गई है। यदि सड़क पर जल्द आवाजाही शुरू नहीं हुई तो तीनों घाटियों और अन्य गांवों की 30 हजार से अधिक की आबादी के साथ ही सेना की दिक्कत बढ़ेगी।
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काली नदी में बनी झील लेकिन खतरा नहीं
धारचूला। पुल बहने की घटना के बाद संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने कुलागाड़ पहुंचकर हालात का जायजा लिया। सामने आया कि पांच हजार फिट की ऊंचाई पर रांथी और जुम्मा से निकलने वाली कुलागाड़ ने आदि कैलाश मार्ग पर आफत फैलाई। यह नाल अपने साथ बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा बहा लाया जो काली नदी में समाए। ऐसे में कुलागाड़ के पास काली नदी का प्रवाह रुकने से यहां कृत्रिम झील भी बनी है हालांकि झील के पानी की निकासी होने से खतरे की आशंका कम है। संवाद
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उफनते नाले में सीढ़ी लगाकर खतरे के बीच हो रही है आवाजाही
धारचूला। एसडीएम आशीष जोशी ने शुक्रवार को बीआरओ के कमांडर कर्नल प्रशांत सिंह, तहसीलदार दमन शेखर राना के साथ कुलागाड़ का निरीक्षण किया। एसडीएम जोशी ने बताया कि सेना की मदद से दोपहर दो बजे उफनते नाले में सीढ़ी लगाकर ग्रामीणों की पैदल आवाजाही शुरू करा दी गई। इन हालात में ग्रामीण उफनते नाले में जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। एसडीएम जोशी ने बताया कि बीआरओ जल्द नए बेली ब्रिज का निर्माण भी शुरू कर देगा। पैदल आवाजाही शुरू होने से ग्रामीणों को कुछ हद तक राहत मिली है।
मलघाट, गस्कू में सड़क बंद
धारचूला। आदि कैलाश मार्ग पर मलघाट और गस्कू में भी पहाड़ी दरकने से आवाजाही ठप है। इन स्थानों पर भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर गिरे हैं। बीआरओ सड़क पर आवाजाही शुरू करने के प्रयास कर रहा है। देर शाम तक भी सड़क पर आवाजाही शुरू नहीं कराई जा सकी। इन स्थानों पर भी दोनों तरफ बड़ी संख्या में वाहन फंसे हैं।