शिव भक्तों के लिए खुशखबरी है। भगवान भोलेनाथ के प्राचीन निवास स्थल आदि कैलाश यात्रा के लिए दो सितंबर से पास बनने शुरू हो जाएंगे। प्रशासन प्रतिदिन 150 पास जारी करेगा। पीएम नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश आने के बाद भगवान शिव के निवास स्थल को वैश्विक पहचान मिली है। प्रधानमंत्री के दौरे के बाद इस साल पहला मौका है जब मई और जून में 21,000 यात्री आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन के लिए आए थे।
मूसलाधार बारिश के चलते सड़क के बंद होने और आपदा के खतरे को देखते हुए 02 जुलाई से यात्रा बंद कर दी थी। 15 सितंबर तक मानसूनी बारिश रुक जाती है। इसे देखते हुए देश भर से श्रद्धालु और पर्यटक आदि कैलाश के दर्शन के लिए आने के इच्छुक हैं। देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यात्रा को लेकर जानकारी ले रहे हैं।
अधिकतर श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन आवेदन भी किया है। इसको देखते हुए प्रशासन ने दो सितंबर से परमिट जारी करने का निर्णय लिया है। दो माह बाद आदि कैलाश यात्रा शुरू होने से पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में खुशी है।
लामारी, बूंदी के बीच सड़क बदहाल
आदि कैलाश पहुंचने के लिए 112 किमी की दूरी तय करनी होती है। इसमें 72 किमी गुंजी तक और शेष 40 किमी की दूरी गुंजी से ज्योलिंगकांग आदि कैलाश तक है। चीन सीमा को जोड़ने वाली धारचूला-तवाघाट-गुंजी सड़क लामारी और बूंदी के बीच कुछ स्थानों पर बेहद खराब हाल में है। इस समय बरसात का मौसम होने से यात्रियों को कुछ स्थानों पर कीचड़ की समस्या से भी दो चार होना पड़ेगा। टूर ऑपरेटर पुनीत कुटियाल और नगेंद्र कुटियाल ने बताया कि तवाघाट से लिपुलेख सड़क के मलघाट, लखनपुर, मालपा, लामारी और बुंदी के बीच पेलसिती झरना और कोथला बैंड आपदा की दृष्टि से अभी भी काफी संवेदनशील है। उन्होंने प्रशासन और बीआरओ से इन जगहों पर स्थानीय समाधान की मांग की है।
टूर ऑपरेटरों को मिली 2000 एडवांस बुकिंग
आदि कैलाश यात्रा के लिए दो सितंबर से परमिट जारी करने का निर्णय लिया है। प्रतिदिन 150 पास जारी किए जाएंगे। सड़क बंद होने की स्थिति में समय पर यातायात सुचारु करने के लिए बीआरओ से भी बातचीत की गई है। अभी बारिश की संभावना भी बनी है। पर्यटकों से अनुरोध है कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार ही यात्रा का प्लान बनाएं।
- मंजीत सिंह, एसडीएम धारचूला।