पिथौरागढ़। सीमांत जिले में खतरा बने ततैयों से निजात दिलाने में जिम्मेदार नाकाम साबित हो रहे हैं। नतीजतन, ततैया आए दिन लोगों पर हमला कर उनकी जान आफत में डाल रहे हैं। नगर के नजदीकी गांव विषाड़ में ततैयों ने 10 साल के बच्चे पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल बच्चे को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है जहां उसका इलाज चल रहा है।
शुक्रवार को भी बिषाड़ निवासी 10 वर्षीय मयंक पुत्र भुवन राम अपने घर के पास ही दुकान में सामान खरीदने गया। वापसी में रास्ते पर खड़े पेड़ पर लगे छत्ते से निकलकर ततैयों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। बच्चा चिल्लाते हुए घर की तरफ दौड़ा। घर पहुंचने के बाद भी उसके पीछे आए कई ततैयों ने उसे डंक मार दिए। इस घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे जहां उसे भर्ती कर उसका इलाज शुरू किया।
ईएमओ डॉ. वर्षा ने बताया कि चिकित्सकों की देखरेख में बच्चे का इलाज चल रहा है। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर है। बीते दो माह में जिलेभर में ततैयों के हमले में घायल होकर 25 से अधिक लोग अस्पताल पहुंचे जहां बमुश्किल उनकी जान बचाई गई। सभी मामलों में घायलों और परिजनों ने वन विभाग को सूचना देकर ततैयों से निजात दिलाने की गुहार लगाई।
बुजुर्ग की हो चुकी है मौत, पत्नी-पोता पहुंचे अस्पताल
12 सितंबर को निशनी गांव में 75 वर्षीय होशियार सिंह पर ततैयों ने हमला कर दिया था। उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती किया लेकिन 11 दिन इलाज के बाद भी उनकी जान नहीं बचाई जा सकी और 23 सितंबर को उनकी मौत हो गई। तब परिजनों और ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना देकर ततैयों से निजात दिलाने की गुहार लगाई लेकिन जिम्मेदार नींद से नहीं जागे। नतीजतन, तीन अक्तूबर को मृतक होशियार सिंह की पत्नी 70 वर्षीय चंपा देवी और दो साल के पोते दक्षित पर उसी छत्ते से निकलकर ततैयों ने हमला कर दिया। जिला अस्पताल में भर्ती कर दादी-पोते की जान बमुश्किल बचाई गई। संवाद
जहां से भी सूचना मिल रही है वहां टीम को भेजकर सुरक्षित तरीके से ततैयों को हटाया जा रहा है। ततैयों के हमले में घायलों को मुआवजा भी दिया जा रहा है -दिनेश जोशी, रेंजर, पिथौरागढ़