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उत्तराखंडः हाईकोर्ट ने तीन हफ्ते टाली हरीश रावत स्टिंग ऑपरेशन की सुनवाई

Fri, 01 Apr 2016 08:48 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल
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हरीश रावत
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन मामले की सुनवाई तीन सप्ताह के लिए टल गई है। शुक्रवार को नैनीताल हाईकोर्ट में कुछ ‌देर की सुनवाई हुई, जिसके बाद न्यायालय की खंडपीठ ने अगल सुनवाई के लिए तीन सप्ताह 22 अप्रैल तक के लिए टाल दी।
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन का मामला नैनीताल हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मामले आज शुक्रवार को कोर्ट में कुछ देर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश के.एम. जोसफ और न्यायमूर्ति वी.के. बिष्ट की खण्डपीठ में निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन की उच्च स्तरीय एसआईटी जांच संबंधी जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की। इस दौरान सुनवाई करते हुए न्यायालय ने तीन हफ्ते बाद का समय दिया है।

स्टिंग के जरिए कथित तौर पर विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की मांग साथ-साथ सीबीआई जांच को लेकर बृहस्पतिवार को जनहित याचिका दायर की गई थी। मामले की सुनवाई शुक्रवार को डबल बेंच में हुई। मामला कोर्ट में पहुंचने से पूर्व सीएम रावत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।  
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मामले के अनुसार दिल्ली निवासी मनन शर्मा ने मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ में जनहित याचिका दायर कर 26 मार्च 2016 को हुए स्टिंग ऑपरेशन मामले की सीबीआई की विशेष टीम से जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने इस प्रकरण में यूनियन ऑफ इंडिया, उत्तराखंड राज्य, प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, पूर्व सीएम हरीश रावत और सीबीआई को पार्टी बनाया है।

उन्होंने याचिका में निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। याचिका में यह भी कहा कि हरीश रावत प्रभावशाली हैं, जिसकी वजह से उत्तराखंड का कोई नागरिक उनके खिलाफ नहीं बोल रहा है। इसलिए वह दिल्ली से यहां पूर्व सीएम के गलत व्यवहार के खिलाफ आए हैं। उन्होंने याचिका में यह भी अनुरोध किया कि इस मामले में कोर्ट जल्द किसी निष्कर्ष तक न पहुंचे, अन्यथा इस जनहित याचिका का महत्व प्रभावित हो सकता है।

स्टिंग की खबरों पर रोक लगाने की मांग

हरीश रावत - फोटो : amar ujala
हाईकोर्ट से स्टिंग ऑपरेशन की खबरें टीवी और पि्रंट मीडिया में प्रसारित और प्रकाशित करने पर रोक लगाने की मांग की गई है। निर्वतमान मुख्यमंत्री हरीश रावत और अल्मोड़ा कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पीतांबर पांडे ने संबंधित खबरों पर रोक लगाने को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले की सुनवाई जल्द होने की संभावना है।

याचिकाकर्ता की ओर से यूनियन ऑफ इंडिया के अलावा समाचार प्लस चैनल के सीईओ उमेश शर्मा, आईबीएन-7, समय लाइव चैनल और प्रिंट मीडिया को पार्टी बनाते हुए कहा गया है कि इनके द्वारा 27 मार्च से लगातार स्टिंग ऑपरेशन की खबरें प्रसारित और प्रकाशित की जा रही है।

याचिका के मुताबिक संबंधित खबरों पर तत्काल रोकने की मांग की गई है। हालांकि मैटर बृहस्पतिवार को रजिस्ट्री में फाइल कर दिया गया है, लेकिन उसमें कुछ कमी होने के चलते याचिका कोर्ट में नहीं आ पाई। बता दें कि जब याचिका में कमी दूर कर ली जाएगी, तभी मामले की सुनवाई हो पाएगी।
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31 विधायकों ने दी राष्ट्रपति शासन को चुनौती

इंदिरा हृदयेश - फोटो : SanjayNegi/AmarUjala
उत्तराखंड में सियासी संकट के दौरान राजनैतिक दलों का हाईकोर्ट की शरण लेने का दौर जारी है।
  पूर्व वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश के साथ पूर्व सीएम हरीश रावत समर्थक 31 अन्य विधायकों ने शुक्रवार को नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत लगाए गए राष्ट्रपति शासन को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी है। इस प्रकरण पर सुनवाई सोमवार को हो सकती है।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता इंदिरा हृदयेश के साथ याचिका फाइल करने वाले विधायकों में दिनेश धनै, हरिदास, सरवत करीम अंसारी, ललित फर्स्वाण, मदन बिष्ट, रेखा आर्या, मनोज तिवारी, हेमेश खर्कवाल, सरिता आर्या, यशपाल आर्या, आरवी गार्डनर, मंत्री प्रसाद नैथानी, प्रीतम सिंह पंवार, हरीश चंद दुर्गापाल, दिनेश अग्रवाल, राज कुमार, हीरा सिंह बिष्ट, ममता राकेश, फुरकान अहमद, सुंदर लाल मंद्रवाल, गणेश गोदियाल, सुरेंद्र सिंह नेगी, मयूख महर, नारायण राम, विजय पाल, राजेंद्र भंडारी, प्रो. जीत राम, प्रीतम सिंह, नवप्रभात, अनुसूया प्रसाद मैखुरी तथा विक्रम सिंह नेगी शामिल हैं।
  उन्होंने राष्ट्रपति शासन के आदेश पर रोक लगाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से हरीश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की निर्वाचित सरकार को दोबारा अस्तित्व में लाने तथा राष्ट्रपति शासन पर रोक लगाते हुए उनके सभी अधिकार बहाल करने की मांग की गई है।
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