देशभर में जहां लोग नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के खेल में शामिल होने लगे हैं वहीं भारत के एक हिस्से के लोग लोकसभा चुनाव के बहिष्कार की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
केदारघाटी के लोग सरकार के उदासीन रवैये ओर आम जिंदगी में आपदा के बाद उठ खड़ी हुई मुसीबतों से आजिज आकर ऐसा कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का फैसला किया है।
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होगा लोकसभा चुनाव का बहिष्कार
विस्थापन एवं पुनर्वास समेत दस सूत्री मांग को लेकर जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग में केदारघाटी विस्थापन एवं पुनर्वास संघर्ष समिति ने महापंचायत का आयोजन किया।
महापंचायत में सरकार की ओर से प्रभावितों की मांगों पर कार्रवाई नहीं किए जाने पर लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया गया है।
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सरकार के खिलाफ सैकडों लोग
एक ओर जब देशभर में मोदी की रैली पर लोग टकटकी लगाए बैठे थे ठीक उसी वक्त केदारघाटी के लोग अपनी जिंदगी की दुश्वारियों को सरकार तक पहुंचाने के लिए उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जैसे छोटे से कस्बे में प्रदर्शन कर रहे थे।
केदारघाटी विस्थापन एवं पुनर्वास संघर्ष समिति के बैनर तले आपदा प्रभावितों ने सरकार के खिलाफ रैली निकालकर अपने गुस्से का इजहार किया।
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प्रभावितों को नहीं मिला मुआवजा
रैली के बाद नए बस अड्डे पर आयोजित महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि आपदा के तीन माह बाद भी अभी तक प्रभावितों को सहायता व मुआवजा नहीं मिला है।
समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा कि विस्थापन के लिए सरकार की ओर से बनाई गई नीति शिथिल है, जिसे सशक्त बनाने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।
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बालिग व्यक्ति को माना जाए इकाई
महापंचायत में आपदा प्रभावित परिवार में प्रत्येक बालिग व्यक्ति को इकाई मानने, व्यवसायिक वाहनों का कर माफ करने, प्रभावितों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता देने आदि की मांग की गई।
इस मौके पर महेंद्र नेगी, पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली, सुशीला भंडारी, वीर सिंह रावत, जिला पंचायत सदस्य अवतार सिंह राणा, डॉ. योगंबर नेगी, रमेश बेंजवाल, आशीष नेगी, विनोद कप्रवाण, महेश ड्यूंडी, डॉ. सुरेश गोदियाल, ओपी बहुगुणा, जगमोहन झिंक्वाण मौजूद थे।