जल संस्थान की ओर से जल जीवन मिशन के तहत हर घर को नल से जोड़ तो दिया गया, लेकिन गलत नियोजन से नल सूखे पड़े हैं। कारण यह है कि जल संस्थान ने स्रोतों का संवर्धन किए बिना कम आबादी के लिए वर्षों पूर्व बनी योजना से सैकड़ों घरों के पेयजल कनेक्शन बांट दिए हैं।
विकास खंड कीर्तिनगर और देवप्रयाग में जल जीवन मिशन ग्रामीणों के लिए सुविधा के स्थान पर परेशानी का कारण बन चुका है। आलम यह है कि जिन गांवों में पहले 10 या 20 कनेक्शन थे, वहां अब 100 से अधिक कनेक्शन हो चुके हैं। इससे मांग अधिक और पूर्ति कम हो चुकी है। ऐसे में किसी भी घर में लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांवों के लिए वर्षों पूर्व पेयजल योजना का निर्माण हुआ था। उस समय गांव की आबादी भी बहुत कम थी। वर्तमान में पेयजल योजनाएं अत्यधिक जर्जर हो चुकी हैं। जल स्रोतों पर भी पानी कम हो चुका है। विभाग ने पेयजल स्रोतों का संवर्धन किए बिना और गांव की आबादी के अनुसार मुख्य पाइप लाइन नहीं बिछाई, बल्कि गांव में पुरानी पाइप लाइन से ही हर घर को नल से जोड़ दिया है। जबकि पहले स्रोत संवर्धन और मुख्य पाइप लाइन की क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए थी। वहीं, पहले गांव में कम ही सार्वजनिक स्थानों पर स्टेंड पोस्ट थे। तब पेयजल की समस्या नहीं थी, लेकिन अब हर घर नल पहुंचने से किसी भी घर को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। संवाद
-जल जीवन मिशन के तहत कीर्तिनगर और देवप्रयाग ब्लाक के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 13,800 पेयजल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 9,000 कनेक्शन हो चुके हैं। आठ योजनाओं पर द्वितीय फेज के तहत स्रोत संवर्धन कार्य चल रहा है। द्वितीय फेज का कार्य होने पर समस्या दूर हो जाएगी। -नरेशपाल सिंह, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान देवप्रयाग।
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