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वेबिनार: ‘वैज्ञानिक साहित्य को कैसे पढ़ा जाए’ पर चर्चा

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गढ़वाल विश्वविद्यालय के वनस्पति एवं सूक्ष्म जैविकी विभाग की ओर से मानव: ह्यूमन एटलस इनीशियेटिव प्रोजेक्ट विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ‘वैज्ञानिक साहित्य (मुख्यत: शोध पत्रों व शोध ग्रंथों) को कैसे पढ़ा जाना चाहिए’ पर परिचर्चा की गई।
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वनस्पति एवं सूक्ष्मजैविकी विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए डीन लाइफ साइंस प्रो. एन सिंह ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौर में इंटरनेट पर कई सूचनाएं उपलब्ध हैं। उनमें से कौन सी सूचना सही है कौन सी गलत इसका चयन करना आम लोगों के लिए मुश्किल है। शोध कार्य में लगे शिक्षकों, छात्रों के लिए यह चुनौतियां और भी जटिल हो जाती हैं, क्योंकि शोध क्षेत्रों में भी निरंतर नए-नए शोध हो रहे हैं। इन शोध सामग्री को कैसे पढ़ना है एवं उनमें से छिपी सूचनाओं को कैसे उपयोग में लाया जाए, यह सीखना पीएचडी एवं लघु शोधकार्यों (डिजर्टेशन) में लगे विद्यार्थियों को जानना आवश्यक है। मुख्य वक्ता मानव: ह्यूमन एटलस इनीशियेटिव की सलाहकार डा. अनुपमा हर्षल ने तथ्यों (लिखित रूप में उपलब्ध विभिन्न जानकारियां) एवं ज्ञान (सभी जानकारियों का समीक्षात्मक अध्ययन करके निकाले गए निष्कर्ष) में अंतर समझाया। उन्होंने तथ्यों को ज्ञान में परिवर्तित करने के बारे में भी बताया। उन्होंने मानव प्लेटफार्म की जानकारी देते हुए कहा कि मानवों से संबधित समस्त शोध सूचनाओें एवं वैज्ञानिक तथ्यों का एक प्लेटफार्म पर संकलन किया गया है। इससे जुड़कर शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं मानव शोध के नवीन पहलुओं को भी समझ सकते हैं। कार्यक्रम में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, आसाम, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश एवं पंजाब के प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. सीएम शर्मा, डा. राहुल कुंवर, डा. विनीत मौर्या, प्रो. राजेश शर्मा, प्रो. एसपी तिवारी, डा. वीडी पांडेय, डा. धनंजय, डा. सुधीर और डा सौरभ यादव आदि शामिल हुए।
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