आरवीएनएल (रेल विकास निगम लिमिटेड) ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में भूमि की कीमत के संबंध में दायर अपील वापस ले ली है। इससे पौड़ी जिले में काश्तकारों को अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, आरवीएनएल की ओर से याचिका वापस लेने के बाद डुंगरीपंथ के परियोजना प्रभावितों ने आंदोलन स्थगित कर दिया है, जिसके चलते यहां परियोजना कार्य शुरू हो गया है। हालांकि पुर्न व्यवस्थापन संबंधी प्रकरण हाईकोर्ट में चलता रहेगा।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलमार्ग परियोजना में आरवीएनएल की ओर से काश्तकारों की जमीन अधिग्रहीत की गई है। पौड़ी जिले के काश्तकार आरवीएनएल की ओर से दिए जाने वाले मुआवजे से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने भूमि का उचित मुआवजा दिलाने की मांग के लिए प्राधिकरण में अपील दायर की। प्राधिकरण ने प्रभावितों को बाजार रेट के हिसाब से भुगतान के निर्देश दिए थे, लेकिन आरवीएनएल इस फैसले के खिलाफ गत वर्ष हाईकोर्ट चला गया।
लंबे समय से भूमि का मुआवजा न मिलने पर डुंगरीपंथ के प्रभावितों ने 26 जुलाई से परियोजना का काम बंद करा दिया था। प्रभावितों की विभिन्न मांगों के संबंध में गत 1 दिसंबर को कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और मुख्य सचिव की मौजूदगी में प्रशासन, आरवीएनएल और प्रभावितों की बैठक आयोजित हुई थी। इसमें आरवीएनएल की ओर से बताया गया था कि काश्तकारों को प्राधिकरण की ओर से निर्धारित दर के मुताबिक भुगतान किया जाएगा। साथ ही मूल धन पर 12 प्रतिशत ब्याज भी दिया जाएगा। 15 दिसंबर को आरवीएनएल ने संबंधित अपील वापस ले ली। आरवीएनएल के वरिष्ठ डीजीएम पीपी बडोगा ने बताया कि बुधवार शाम से काम शुरू हो गया है।