जम्मू। डोमिसाइल कानून का जहां विरोध शुरू हो गया है वहीं विपक्षी दलों को बैठे बिठाए राजनीतिक मुद्दा मिल गया है। खासतौर से नेकां, कांग्रेस, अपनी पार्टी व पैंथर्स आदि दल इस मुद्दे को किसी भी हालत में छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। मुख्य दलों में से केवल भाजपा ही अब तक डोमिसाइल अधिसूचना का स्वागत कर रही है।
पीडीपी पूर्व की तरह महबूबा मुफ्ती की गैैर मौजूदगी में सक्रिय राजनीति से अभी भी दूर है और पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की रिहाई का बेसब्री से इंतजार कर रही है। पार्टियों में पीडीपी को छोड़कर अन्य दलों के नेता एक-दूसरे के संपर्क में भी हैं। विपक्षी दल युवाओं तक इस मुद्दे को लेकर जाना चाहते हैं ताकि केंद्र सरकार को घेरा जा सके। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी डोमिसाइल नियमों की अधिसूचना पर तीखी प्रतिक्रिया जताकर भविष्य की राजनीति की तरफ साफ इशारा कर चुके हैं।
डोमिसाइल कानून के खिलाफ पैंथर्स पार्टी चेयरमैन हर्ष देव सिंह ने वीरवार को पार्टी कार्यालय के बाहर डोमिसाइल कानून के खिलाफ हाथों में पोस्टर लेकर विरोध व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ विश्वासघात किया है। शिक्षित बेरोजगार युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अनुच्छेद 370 हटाने की बात करने वाली सरकार ने अपना असली रूप दिखाया है।
शिवसेना बाला साहेब ठाकरे जेएंडके अध्यक्ष मनीष साहनी ने डोमिसाइल की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इसे जम्मू-कश्मीर के युवाओं के साथ धोखा, खिलवाड़ और नाइंसाफी है। साहनी ने कहा कि इसे ऐसे समय लागू किया गया है कि कोई इसका विरोध करने के लिए सड़कों पर भी नहीं उतर सकता। साहनी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए 80 प्रतिशत का कोटा आरक्षित होना चाहिए। ऐसा न होने पर उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
युवा कांग्रेस अर्बन के जिलाध्यक्ष राहुल टंडन ने कहा कि भाजपा सरकार ने डोमिसाइल लोगों पर थोप दिया है। यह फैसला स्वीकार नहीं है। युवाओं के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने जम्मू-कश्मीर के लिए नए डोमिसाइल कानून को लोगों के साथ मजाक बताया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी की दर राष्ट्रीय बेरोजगारी दर से अधिक है। ऐसे में नए डोमिसाइल कानून में बाहरी राज्यों के युवाओं के लिए रोजागार के द्वार खोलना प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना है।