श्रीनगर नगर निगम परिसर में इस तरह से धूल फांक रही नगर बस सेवा
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नगर पालिका को नगर निगम तो बना दिया गया लेकिन लोगों की परेशानियों को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया है। वर्ष 2009 से नगर में संचालित की जा रही बस सेवा को सुधारने के बजाय वर्ष 2018 तक पूर्ण रूप से ठप कर दिया गया है। इस कारण लोगों को चार किमी की दूरी तय करने के लिए 20 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। इस लापरवाही से स्कूली छात्र और अस्पताल जाने वाले मरीज खासे परेशान हैं।
नगर में आवागमन की समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2009 में तत्कालीन पालिकाध्यक्ष मोहन लाल जैन ने नगर बस सेवा शुरू की थी। इसके लिए करीब 19.73 लाख की लागत से दो बसें खरीदी गईं। उनका न्यूनतम किराया पांच रुपये रखा गया था। बाद में यह किराया बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया। यह बसें श्रीनगर से श्रीकोट, स्वीत पुल, डेम साइड, भक्तियाना, तहसील, धोबीघाट, उफल्डा, कीर्तिनगर तक संचालित होती थी। बस सेवा से अस्पताल जाने-आने वाले लोगों समेत स्कूली छात्रों को भी सुविधा मिलती थी लेकिन रखरखाव के अभाव में वर्ष 2014 में एक बस में खराबी आने से वह पालिका परिसर में खड़ी कर दी गई। दूसरी बस ने भी वर्ष 2018 में दम तोड़ दिया। आज स्थिति यह है कि एक बस पालिका परिसर और दूसरी रोडवेज बस अड्डे पर जंक खा रही है। इसके बाद वर्तमान पालिकाध्यक्ष पूनम तिवारी ने नगर में ई-रिक्शा संचालन के लिए ट्रायल करवाया। इसमें एसडीएम, एआरटीओ, लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौजूद थे लेकिन यह प्रयास भी ट्रायल तक ही सीमित रहा। इस कारण वर्तमान में आम लोगों और स्कूली छात्रों को चार किलोमीटर के सफर के लिए 20 रुपये किराया चुकाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नजदीक की सवारी होने पर बस चालक भी उन्हें बस में नहीं बैठने देते हैं। इस कारण उन्हें टैक्सी या पैदल आना-जाना पड़ता है। संसाधनों के अभाव में सबसे अधिक समस्या तहसील मुख्यालय श्रीनगर और पराग व धोबी घाट के निवासियों को उठानी पड़ रही है।
कोट :
नगर पालिका में अधिशासी अधिकारी की नियुक्ति न होने से कोई काम नहीं हो पा रहे है। नगर में ई-रिक्शा संचालन की योजना थी इसके लिए ट्रायल भी करवाया गया। एआरटीओ से अब तक पालिका को रिपोर्ट नहीं भेजी गई। इस कारण योजना पर कार्य नहीं हो पाया है।-पूनम तिवारी, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीनगर।