श्रीनगर। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग सरकार द्वारा पर्यटन की अनुमति दिए जाने से उत्साहित नहीं हैं। उनका कहना है कि जिस तरह से संक्रमण बढ़ रहा है, उस लिहाज से अभी गतिविधियां शुरू करने की परिस्थितियां नहीं हैं। घाटी के अधिकांश हिस्सों में लॉकडाउन है। ऐसे में पर्यटकों के आने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। सरकारी कदम भी जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। उन्होंने पर्यटन उद्योग के लिए बेलआउट पैकेज की मांग की।
बता दें, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने चरणबद्ध तरीके से पर्यटन क्षेत्र खोलने का फैसला किया है और फिलहाल इसे सिर्फ हवाई मार्ग से आने वाले पर्यटकों के लिए सीमित रखा गया है। इसमें भी 65 वर्ष से भी अधिक उम्र के पर्यटकों को नहीं आने की सलाह दी गई है।
ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ कश्मीर (टीएएके) के अध्यक्ष अशफाक सिद्दीकी का कहना है कि कोरोना महामारी के दौर में लोगों के लिए पर्यटन सबसे अंतिम जरूरत है। हमें जमीनी हकीकत को देखना होगा। पूरी दुनिया एक बड़े संकट से जूझ रही है। पर्यटन जैसी चीजें धीरे-धीरे पटरी पर आएंगी। वर्तमान परिस्थितियों में पर्यटकों का स्वास्थ्य हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है। एक तरफ प्रशासन ने पर्यटन खोलने की घोषणा की है दूसरी ओर कश्मीर घाटी के अधिकांश हिस्सों में लॉकडाउन है। सिर्फ श्रीनगर में ही 90 इलाकों में प्रतिबंध लागू हैं। ऐसे में हम पर्यटकों के आने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं।
युवा होटल व्यवसायी आसिफ बुर्जा कहते हैं कि हमें पर्यटन उद्योग का बुनियादी ढांचा कोरोना महामारी के अनुुरूप बनाना होगा। कोरोना महामारी से कब निजात मिलेगी, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। लिहाजा बदली हुई परिस्थितियों के लिए हमें नए सिरे से शुरूआत करनी होगी। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटन उद्योग के लिए बेलआउट पैकेज की मांग की है।
जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियां अन्य हिस्सों से अलग
बुर्जा ने कहा, जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियां देश के अन्य हिस्सों से अलग हैं। पहले हमें पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाने के बाद की लागू प्रतिबंधों की परिस्थितियों से निपटना पड़ा उसके बाद कोरोना ने पूरा उद्योग प्रभावित कर दिया।