पौड़ी के राठ क्षेत्र में कुठ की खेती का एचएनबी गढ़वाल के हैप्रेक (उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र) का प्रयोग सफल रहा है। जिले के नौला-भैंसवाड़ा के किसानों के साथ मिलकर एक क्विंटल कुठ को तैयार किया गया है। बाजार में कुठ साढ़े तीन सौ रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिकता है। हैप्रेक के वैज्ञानिकों के अनुसार, पौड़ी में पहली बार कुठ का उत्पादन हुआ है। जिला प्रशासन रुचि ले तो बंजर भूमि में इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन हो सकता है।
हैप्रेक के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. विजयकांत पुरोहित ने बताया कि नौला-भैंसवाड़ा में प्रगतिशील काश्तकार विनोद रावत के नेतृत्व में 100 काश्तकारों ने कुठ की खेती की। दो साल की मेहनत के बाद एक क्विंटल कुठ तैयार हुआ है। इसकी बिक्री भी शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि एक हेक्टेअर भूमि में 4.65 मीट्रिक टन कुठ का उत्पादन हो सकता है। पतंजलि फार्मेसी, अयूर हर्बल, डाबर एवं ह्युमन इंडिया समेत कंपनियों में कुठ की बड़ी मांग है।
ये है कुठ
कुठ एस्ट्रेसी कुल की वनस्पति है। वर्तमान में दोहन की वजह से यह संकटग्रस्त पादप प्रजाति में शामिल है। कुठ की जड़ें कुष्ठ, वात, कफ, शामक, रक्तदोषांतक, श्वेत प्रदर, वीर्यवर्धक, उदरमूल, अतिसार, दांत दर्द एवं मूत्रालय संबंधी रोगों के निवारण में काम आती है। लाहौल स्फीति में इसे पारंपरिक विधि से सर्दी-जुकाम, बुखार पेट-दर्द व छाती दर्द के उपचार में प्रयोग किया जाता है।