उत्तराखंड पेयजल निगम कर्मचारी महासंघ की मंडलीय बैठक में 10 सूत्री मांगों पर कार्रवाई न होने से नाराज कर्मियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया। कहा कि आश्वासन के बाद भी आज तक शासन ने उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की है।
शनिवार को नगर के एक होटल में पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, देहरादून और रुद्रप्रयाग जिलों से पहुंचे उत्तराखंड पेयजल निगम कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें उत्तराखंड पेयजल निगम और जलसंस्थान का एकीकरण न किए जाने व राजकीय विभाग घोषित न करने पर आक्रोश जताया गया। इस मौके पर कर्मियों ने दोनों विभागों के एकीकरण न होने तक कर्मियों के वेतन और पेंशन का भुगतान कोषागार से किए जाने की मांग की है। साथ ही विभाग में लिपिक संवर्ग में रिक्त पदों के सापेक्ष पदोन्नति, सातवें वेतनमान के एरियर का भुगतान, कनिष्ठ सहायक के पदों को भरने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, उपनल के माध्यम से तैनात कंप्यूटर आफरेटर्स को कनिष्ठ सहायक के पदों पर नियुक्त किए जाने, लेखा संवर्ग का गठन, सरकारी आवासीय भवनों की मरोम्मत, श्रीनगर में महासंघ को भवन आवंटन करने व लिपिक संवर्ग के कर्मियों की स्थायी नियुक्ति की सूची शीघ्र जारी करने की मांग उठाई। बैठक में कर्मियों ने आक्रोश जताया कि पेयजल निगम और जलसंस्थान विभागों के एकीकरण और राजकीयकरण को लेकर कैबिनेट में चर्चा हो चुकी है, लेकिन आज तक इसका शासनादेश जारी नहीं किया गया है।
बैठक में महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष विजय खाली, सचिव शलभ मित्तल, शेखरानंद जोशी, उपाध्यक्ष भगवती प्रसाद, धर्मेंद्र चौधरी, गिरीश चंद्र द्विवेदी, ललित मोहन, प्रदीप कठैत, अंकित कंडवाल, वीरेंद्र रावत, विक्रम सिंह, कुमार गौरव, अनुराग, धन सिंह नेगी, राजपाल राणा, संतोष पंवार, डीएस जगवाण, कुंवर सिंह, सुशील पटवाल, राजन टम्टा, राजेंद्र प्रसाद, इंद्रमणि मनोड़ी, भक्त दर्शन गैरोला व अंबेश बहुगुणा आदि मौजूद थे।