ेवप्रयाग के जंगलों में गुलदार को पकड़ने का अभ्यास करते हुए वन विभाग की टीम।
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वन विभाग की आरआरटी (रेपिड रिस्पास टीम) ने वन्यजीवों की सुरक्षा एवं जनहानि को रोकने के मकसद से वनकर्मियों को प्रशिक्षण दिया। इस दौरान प्रशिक्षकों ने वनकर्मियों को जंगली जानवर पकड़कर सुरक्षित तरीके से आबादी से बाहर ले जाने के गुर सिखाए।
नरेंद्रनगर वन प्रभाग के कीर्तिनगर और देवप्रयाग रेंज में वनकर्मियों का प्रशिक्षण चल रहा है। इस दौरान देवप्रयाग के जंगलों में मॉक ड्रिल कर गुलदार को पकड़ने का अभ्यास किया गया।
इस दौरान टीम ने गुलदार को बेहोश (ट्रेंकुलाइज) करने, पिंजड़े में कैद करने और जाल से पकड़ने का अभ्यास किया। टीम को वाई पोल से गुलदार को पकड़ने का तरीका भी बताया गया। टीम लीडर रेंजर देवेंद्र पुुंडीर ने बताया कि आमतौर पर आबादी के लिए खतरा बने गुलदार को बेहोश कर या किसी जानवर का लालच देकर पकड़ा जाता है, लेकिन कई बार गुलदार आपसी संघर्ष या दुर्घटना से घायल व बीमार हो जाते हैं, तो वाई पोल विधि प्रयोग की जाती है। इसमें ऐसा पाइप प्रयोग किया जाता है, जिसका सिरा वाई आकार का होता है। इसको अशक्त हो गए गुलदार के गर्दन में फंसाकर काबू किया जाता है। इससे उनको कोई चोट आने का खतरा नहीं होता है।
उन्होंने बताया कि आरआटी को जंगली जानवरों को पकड़ने वाले उपकरणों से लैस किया गया है। दोनों रेंज में वनकर्मियों को इन उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में ट्रेंकुलाइज प्रशिक्षक संजय रौथाण, सुरेश पैन्यूली, नेट रेस्क्यू प्रशिक्षक ओम प्रकाश अमोला, राकेश चौहान, वन दारोगा सुखदेव बडोनी, लखपत मंडोला व सरोप सिंह आदि ने प्रतिभाग किया।