वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कॉलेज का रेडियो डायग्नोसिस विभाग एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट के भरोसे चल रहा है। रेडियोलॉजिस्ट को सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और एक्सरे आदि की जांच करनी होती है। ऐसे में उनके ऊपर काम का दबाव बढ़ रहा है। साथ ही मरीजों को भी इंतजार करना पड़ रहा है।
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के रेडियो डायग्नोसिस विभाग में रेडियोलॉजिस्ट और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से सेवाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। संस्थान उपलब्ध मानव संसाधन के दम पर ही काम चला रहा है। विभाग में 11 रेडियोलॉजिस्ट के पद स्वीकृत हैं, लेकिन कार्यरत सिर्फ सीनियर रेजीडेंट (एसआर) पद पर डॉ. ज्योति जोशी ही हैं। एक्सरे तो तकनीशियन कर लेते हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन उन्हें खुद करने पड़ते हैं। अस्पताल में सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जांचों के लिए रोजाना कम से कम 40 से 50 मरीज आते हैं, जिससे इन कामों में देरी हो रही है। मरीजों को जांच के साथ ही जांच रिपोर्ट के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है। इसी तरह यहां रेडियोग्राफर और डार्क रूम असिस्टेंट की भी कमी बनी है। कोरोना काल में उपनल और आउटसोर्स एजेंसी से पांच तकनीशियन नियुक्त हुए थे। उस दौर में व्यवस्था में थोड़ा सुधार हुआ था। वर्तमान में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, जिससे व्यवस्था लड़खड़ा गई है।
यह है स्थिति
पदनाम स्वीकृत कार्यरत रिक्त
प्रोफेसर 1 0 1
एसोसिएट प्रो. 2 0 2
सहायक प्रो. 2 0 2
एसआर 6 1 5
रेडियोग्राफर 11 5 6
डार्क रूम सहायक 4 2 2
मेडिकल कॉलेज में सेवाएं सुचारु चल रही हैं। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के प्रयास चल रहे हैं, जबकि तकनीशियनों की नियुक्ति उपनल या पीआरडी के माध्यम से की जाएगी। - प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर।