डाक्टर का भारी मात्रा में नींद की गोलियां (एल्प्रेक्स) लिखने और चीफ फार्मासिस्ट का मरीज को लौटाने पर बेस अस्पताल में विवाद खड़ा हो गया।
नाराज एसआर (सीनियर रेजीडेंट) और जेआर (जूनियर रेजीडेंट) ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी देते हुए करीब तीन घंटे सेवाएं बाधित रखी। फार्मासिस्ट के माफी मांगने और प्रशासनिक आधार पर उसको पटल से हटाने का आदेश जारी होने पर ही डाक्टर शांत हुए।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को दवाई वितरण पटल में मौजूद चीफ फार्मासिस्ट एसपी सेमवाल को एक महिला ने दवाई की पर्ची दी। पर्ची पर डाक्टर ने एल्प्रेक्स की 30 गोलियां लिखी थी।
उन्होंने मरीज को यह कहकर लौटा दिया कि यह नींद की गोलियां हैं और इतनी मात्रा में नहीं दे सकते हैं। महिला पर्चा लेकर उपचार करने वाले डा. नीरज के पास पहुंची।
फार्मासिस्ट सेमवाल का आरोप है कि डा. नीरज अपने साथियोें के साथ उन्हें मारने आए। यदि उन्हाेंने दरवाजा अंदर से बंद नहीं किया होता, तो उसकी पिटाई हो जाती।
हंगामा होने की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। फार्मासिस्ट का कहना था कि शासनादेश के अनुसार उसे हक है कि वह दवा देने का कारण पूछ सकता है और इसको बदल भी सकता है। दवा देने से पहले उसने महिला को पूछा भी था कि क्या उसे नींद नहीं आने की शिकायत है। महिला के मना करने पर उसने डाक्टर के पास वापस भेजा।
वहीं इमरजेंसी के बाहर एसआर और जेआर अपनी ड्यूटी छोड़ एकत्रित हो गए। उनका आरोप था कि फार्मासिस्ट काफी समय से ऐसी हरकत कर रहा है।
वह डाक्टरों के लिखे नुस्खे को चुनौती देता है। उनकी मांग पर संबंधित फार्मासिस्ट को कोतवाल उत्तम सिंह की मौजूदगी में वार्ता के लिए लाया गया। करीब चार बजे चिकित्सा अधीक्षक सुरेश जैन के कक्ष में अस्पताल प्रबंधन की ओर से लिए गए निर्णय और फार्मासिस्ट के लिखित माफी पर डाक्टर माने।